जीते जी न्याय नहीं मिला… साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत ने खड़े किए 5 बड़े सवाल, SIT करेगी हर राज़ का खुलासा

जोधपुर | Headlinesip Special Report

राजस्थान की धार्मिक और सामाजिक दुनिया उस वक्त सन्न रह गई, जब महज 25 वर्षीय युवा कथावाचक और गौ-सेविका साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध हालात में मौत की खबर सामने आई।
जिस साध्वी को लोग श्रद्धा, तप और सेवा का प्रतीक मानते थे, उसकी अचानक हुई मौत अब एक रहस्यमयी केस बन चुकी है।

सबसे चौंकाने वाली बात—
मौत के कुछ घंटे बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से किया गया एक भावुक पोस्ट, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी।

“जीते जी तो न्याय नहीं मिला, शायद मरने के बाद मिल जाए…”

यह पंक्ति अब सिर्फ एक पोस्ट नहीं, बल्कि जांच का सबसे बड़ा सुराग बन चुकी है।


साध्वी प्रेम बाईसा जोधपुर आश्रम

वह काली रात: इंजेक्शन, बेचैनी और अचानक मौत

घटना 28 जनवरी की है।
परिजनों के मुताबिक, साध्वी प्रेम बाईसा को हल्का बुखार और सर्दी-जुकाम था। इलाज के लिए आश्रम में ही एक कंपाउंडर को बुलाया गया।

आरोप है कि:

  • कंपाउंडर ने इंजेक्शन लगाया
  • कुछ ही मिनटों में साध्वी की तबीयत तेजी से बिगड़ गई
  • उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया
  • लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया

साध्वी के पिता वीरम नाथ का सीधा आरोप है:

“मेरी बेटी की मौत गलत इंजेक्शन की वजह से हुई है। यह लापरवाही नहीं, अपराध है।”


मौत के बाद इंस्टाग्राम पोस्ट: सबसे बड़ा सवाल

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के 3–4 घंटे बाद, उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट शेयर हुआ।

यहीं से मामला पूरी तरह पलट गया।

अब पुलिस के सामने सवाल हैं:

  1. अगर साध्वी प्रेम बाईसा की मौत हो चुकी थी, तो पोस्ट किसने किया?
  2. क्या यह पोस्ट पहले से Scheduled थी?
  3. क्या किसी और के पास उनका मोबाइल फोन था?
  4. क्या साध्वी मानसिक दबाव में थीं?
  5. या यह किसी साजिश का संकेत है?

इसी पोस्ट के आधार पर पुलिस ने जांच को सिर्फ मेडिकल केस से आगे बढ़ाकर मनोवैज्ञानिक और आपराधिक एंगल में मोड़ दिया।


साध्वी प्रेम बाईसा अंतिम संस्कार

पुराना विवाद: वीडियो, बदनामी और ब्लैकमेलिंग

जांच में एक पुराना मामला भी फिर से सामने आया है।

जुलाई 2025 में साध्वी प्रेम बाईसा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह अपने पिता को गले लगा रही थीं।
कुछ असामाजिक तत्वों ने उस वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया, जिससे साध्वी को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।

परिजनों का आरोप है कि:

  • साध्वी को बदनाम किया गया
  • उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश हुई
  • यह तनाव लंबे समय तक उनके साथ रहा

अब सवाल यह है—
क्या वही दबाव अब भी जारी था?


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SIT का गठन: जांच अब हाई-प्रोफाइल

मामले की संवेदनशीलता और जनभावना को देखते हुए जोधपुर पुलिस कमिश्नर ने एक SIT (Special Investigation Team) का गठन किया है।

अब तक की प्रमुख कार्रवाई:

  • ✅ कंपाउंडर को हिरासत में लेकर पूछताछ
  • ✅ विसरा रिपोर्ट (Viscera Report) का इंतजार
  • ✅ मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट की फोरेंसिक जांच
  • ✅ कॉल डिटेल्स और चैट हिस्ट्री खंगाली जा रही

पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच में कोई भी एंगल छोड़ा नहीं जाएगा


अंतिम विदाई: नम आंखों से भू-समाधि

शुक्रवार को साध्वी प्रेम बाईसा को उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) में
संत परंपरा के अनुसार भू-समाधि दी गई।

हजारों श्रद्धालु, संत और ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
हर चेहरे पर एक ही सवाल था—
क्या साध्वी को जीते जी इंसाफ नहीं मिला?


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🔴 ताज़ा अपडेट: पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सस्पेंस बरकरार, FSL के बाद ही खुलेगा मौत का राज

विश्वसनीय सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा की पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार होने के बाद संबंधित थाने को भेज दी गई है, हालांकि अभी तक रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ संकेत (Indications) जरूर मिले हैं, लेकिन अंतिम ओपिनियन देने से पहले FSL रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि FSL रिपोर्ट आने में अभी करीब 3 दिन का समय लगेगा, और उसके बाद ही MGH (माथुरादास माथुर हॉस्पिटल) के मेडिकल बोर्ड द्वारा ऑफिशियल मेडिकल ओपिनियन जारी की जाएगी
इधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर लगातार अलग-अलग दावे और अटकलें सामने आ रही हैं—शुरुआत में जहां इंजेक्शन रिएक्शन की बात कही जा रही थी, वहीं अब इंजेक्शन के अलावा किसी अन्य विषाक्त पदार्थ के सेवन की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। इसी बीच, किसी पुराने मामले को लेकर मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसी अफवाहें भी सोशल मीडिया पर उड़ रही हैं। गौरतलब है कि साध्वी के पिता ब्रह्मः नाथ ने स्वयं स्वीकार किया था कि साध्वी कुछ मामलों को लेकर परेशान थीं और न्याय की मांग कर रही थीं, जबकि साध्वी प्रेम बाईसा ने भी कई बार सोशल मीडिया के जरिए न्याय को लेकर अपने विचार सार्वजनिक रूप से व्यक्त किए थे। अब पूरे मामले में सच्चाई क्या है—इसका जवाब FSL रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की अंतिम राय के बाद ही सामने आ पाएगा।

सिर्फ मौत नहीं, सिस्टम की परीक्षा

यह मामला सिर्फ एक साध्वी की मौत का नहीं है।
यह मेडिकल जिम्मेदारी, सोशल मीडिया दुरुपयोग, मानसिक उत्पीड़न और न्याय व्यवस्था—सबकी परीक्षा है।

अब नजरें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
क्योंकि अगर सच सामने नहीं आया, तो यह मामला आस्था और न्याय—दोनों पर सवाल बन जाएगा।

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