सेना की किताबों पर नए नियम: Defence Ministry का बड़ा फैसला

Defence Ministry की सख्ती से Serving और Retired अफसरों में हलचल

नई दिल्ली:
सेना की किताबों पर नए नियम लाने की तैयारी में रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) अब एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाने जा रहा है। सशस्त्र बलों से जुड़े serving और retired सैन्य अधिकारियों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली किताबों, संस्मरणों और लेखों को लेकर सरकार एक सख्त और बाध्यकारी फ्रेमवर्क तैयार कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में बिना सरकारी मंज़ूरी कोई भी सैन्य पांडुलिपि (Manuscript) प्रकाशित नहीं की जा सकेगी। यह बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीयता और सैन्य अनुशासन को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।


🔍 सेना की किताबों पर नए नियम: क्या बदलने जा रही है व्यवस्था?

हाल ही में रक्षा मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें नए नियमों की संरचना को लेकर विस्तृत प्रेज़ेंटेशन दी गई। अधिकारियों ने साफ किया कि यह पहल किसी एक घटना से नहीं, बल्कि लंबे समय से महसूस की जा रही ज़रूरत का परिणाम है।

सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—
👉 संवेदनशील सैन्य जानकारी के अनियंत्रित प्रकाशन पर रोक।


सेना की किताबों पर नए नियम रक्षा मंत्रालय का फैसला

🛑 Pre-Publication Clearance होगा अनिवार्य

प्रस्तावित नियमों के तहत:

  • कोई भी serving सैन्यकर्मी
  • या सेवानिवृत्त (Retired) अधिकारी

अपनी किताब, संस्मरण या सैन्य अनुभव से जुड़ा कोई भी कंटेंट पहले सरकारी जांच और मंज़ूरी के बिना प्रकाशित नहीं कर सकेगा

यह मंज़ूरी प्रक्रिया:

  • पांडुलिपि पूरी होने के बाद
  • तय सरकारी चैनल के माध्यम से
  • संबंधित प्राधिकरण को भेजकर
    पूरी की जाएगी।

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🏛️ Approval Chain होगी तय और लिखित

अब तक सबसे बड़ी समस्या यह थी कि:

  • किस स्तर से अनुमति लेनी है
  • कौन-सा विभाग समीक्षा करेगा
  • अंतिम फैसला कौन करेगा

इस पर कोई स्पष्ट नियम नहीं था।

सेना की किताबों पर नए नियम के तहत अब:

  • पूरी Approval Chain लिखित होगी
  • जिम्मेदार विभाग तय होंगे
  • जवाबदेही भी स्पष्ट होगी

👤 Retired Officers भी नियमों के दायरे में

यह बदलाव सबसे ज्यादा चर्चा में है।

अब तक कई सेवानिवृत्त अधिकारी:

  • सैन्य ऑपरेशनों पर किताबें
  • रणनीतिक विश्लेषण
  • निजी संस्मरण

बिना किसी औपचारिक मंज़ूरी के प्रकाशित कर रहे थे।

नए नियमों में: 👉 Retired personnel भी उसी प्रक्रिया से गुजरेंगे, जिससे serving अफसर गुजरते हैं।


⚖️ कानूनी आधार: किन कानूनों के तहत होगी कार्रवाई?

रक्षा मंत्रालय इन सेना की किताबों पर नए नियम को मजबूत कानूनी आधार देने की तैयारी में है। इसके लिए:

🔹 Service Conduct Rules

सेवारत कर्मियों पर पहले से लागू अनुशासन नियमों को सख्ती से जोड़ा जाएगा।

🔹 Official Secrets Act

अगर किसी किताब में:

  • गोपनीय सैन्य जानकारी
  • ऑपरेशनल डिटेल
  • रणनीतिक इनपुट

पाया गया, तो Official Secrets Act के तहत कार्रवाई संभव होगी।


🚫 “No Manuscript Without Clearance” — नया सिद्धांत

रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का स्पष्ट संदेश है:

“अब कोई भी Manuscript बिना Clearance प्रकाशित नहीं होगा।”

डिजिटल पब्लिशिंग, सोशल मीडिया और ई-बुक प्लेटफॉर्म्स के दौर में सरकार अब
👉 Preventive Control Model अपनाने जा रही है, ताकि विवाद बाद में नहीं, पहले रोका जा सके।


🧠 विशेषज्ञों की राय: क्यों जरूरी था यह फैसला?

रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि:

  • सैन्य अनुभव साझा करना गलत नहीं
  • लेकिन बिना फ़िल्टर जानकारी देश की सुरक्षा के लिए जोखिम बन सकती है

सेना की किताबों पर नए नियम:

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म नहीं करते
  • बल्कि उसे जिम्मेदारी के दायरे में लाते हैं

⏳ आगे क्या? जल्द आएंगी Formal Guidelines

सूत्रों के अनुसार:

  • नियमों का ड्राफ्ट लगभग तैयार है
  • जल्द ही Formal Guidelines जारी होंगी
  • इसके बाद तीनों सेनाओं को आधिकारिक निर्देश भेजे जाएंगे

यानि आने वाले समय में
👉 सेना से जुड़ी हर किताब सरकार की निगरानी में होगी

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क्या आपको लगता है कि रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों पर भी ऐसे नियम लागू होने चाहिए?
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