11 मई 2025, देहरादून – हिमालय की गोद में बसे Himalayan Cultural Center, Kaulagarh का मंच आज बाल प्रतिभाओं की मोहक प्रस्तुतियों से गूंज उठा, जब Small Bells (Multi Activity Hub) ने अपने वार्षिक दिवस समारोह 2025 का भव्य आयोजन किया। दोपहर 3 बजे प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम ने सांस्कृतिक उत्सव की गरिमा को नए शिखर पर पहुँचा दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन और वैदिक मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद मंच पर जो हुआ, वह देहरादून की सांस्कृतिक स्मृति में सदा के लिए दर्ज हो गया।
जब प्रतिभा ने ली उड़ान…
108 बाल कलाकारों ने मंच पर एक के बाद एक जो प्रस्तुतियाँ दीं, वह केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव था। फ्यूजन म्यूजिक, शास्त्रीय गायन, कथक, ओडिसी और लोक नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की भाव-भंगिमा, लय और आत्मविश्वास ने यह सिद्ध किया कि Small Bells केवल गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि सपनों को आकार देने वाली प्रयोगशाला है।
सम्मान के क्षण: मोमेंटो और प्रमाण पत्र

हर प्रतिभागी को मंच पर बुलाकर मोमेंटो और प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। जब मंच से बच्चों के नाम पुकारे गए और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्हें सम्मानित किया गया, तो वह दृश्य गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गया।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने पहुंचे माननीय अतिथि –
- श्रीमती मधु भट्ट – राज्य मंत्री व उपाध्यक्ष, उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद
- श्री सुनील उनियाल (गामा) – पूर्व मेयर, देहरादून नगर निगम
- श्रीमती नीतू श्री संजय श्रीवास्तव – चैनल हेड, इंडिया न्यूज़
- श्रीमती साधना डॉ संजीव शर्मा – वरिष्ठ पत्रकार व अध्यक्ष, उत्तराखंड महिला संगठन (UMA)
इन सभी गणमान्य अतिथियों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की मुक्त कंठ से सराहना की और कहा कि ऐसी गतिविधियाँ ही आने वाली पीढ़ी को आत्मविश्वास, संस्कृति और सामूहिकता से जोड़ती हैं।
अभिभावकों के चेहरों पर था गर्व
दर्शक दीर्घा में बैठे अभिभावकों के चेहरों पर संतोष और गर्व झलक रहा था। कई भावुक हो उठे जब उनके बच्चों ने मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति दी। यह केवल कला का उत्सव नहीं, परिवारों और समुदायों के लिए गर्व का पर्व बन गया।
Small Bells के इस वार्षिक समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब मंच मिलता है, तो प्रतिभा स्वयं बोल उठती है। यह आयोजन न केवल एक दिन की घटना थी, बल्कि आने वाले कई वर्षों तक बच्चों के आत्मविकास और सांस्कृतिक संवर्धन का मार्ग प्रशस्त करेगा।
शिव-पार्वती विवाह और समुद्र मंथन की लीला
बाल कलाकारों द्वारा शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और विषपान की पौराणिक लीला को नाट्य रूप में मंचित किया गया। बच्चों ने भगवान शिव की गंभीरता, माता पार्वती की सौम्यता, देवताओं का उल्लास और समुद्र मंथन की रहस्यमयता को अपने अभिनय से सजीव कर दिया। जब भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया और कंठ नीला हुआ, तो दर्शकों में मौन और श्रद्धा का माहौल बन गया।
यह प्रदर्शन केवल एक अभिनय नहीं था, बल्कि सनातन संस्कृति की गहराई को बालमन से प्रकट करने का भावनात्मक क्षण था।
Small Bells: केवल गतिविधियाँ नहीं, संस्कारों की पाठशाला
इस कार्यक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि Small Bells एक बहुआयामी मंच है, जहाँ केवल कला नहीं, बल्कि संस्कृति, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति को पंख मिलते हैं।
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