सुप्रीम कोर्ट हुआ हाईटेक: तारीख पे तारीख नहीं, अब सिर्फ न्याय

CJI सूर्य कांत का मास्टरस्ट्रोक — AI ब्रह्मास्त्र से बदलेगा भारतीय न्याय तंत्र

नई दिल्ली | 29 जनवरी 2026

“देर से मिला न्याय, अन्याय के बराबर है”—यह पंक्ति वर्षों से भारतीय न्याय प्रणाली की सबसे बड़ी चुनौती को बयान करती रही है। लेकिन अब लगता है कि इस चुनौती से निपटने की ठोस शुरुआत हो चुकी है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्य कांत ने आज सुप्रीम कोर्ट को पूरी तरह डिजिटल और AI-संचालित युग में ले जाने वाली तीन ऐतिहासिक पहल लॉन्च कीं। इसे न्यायपालिका के इतिहास में एक टेक्नोलॉजिकल टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।

इन पहलों का सीधा लक्ष्य है—
👉 केस पेंडेंसी कम करना
👉 न्याय की रफ्तार बढ़ाना
👉 आम नागरिक के लिए सिस्टम को पारदर्शी बनाना


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⚖️ सुप्रीम कोर्ट में AI की एंट्री: क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक?

भारत में आज भी लाखों केस सालों तक लंबित रहते हैं। फाइलें, रजिस्टर, मैनुअल एंट्री और सूचनाओं की देरी—ये सभी देरी के बड़े कारण रहे हैं।

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए CJI सूर्य कांत ने स्पष्ट कहा कि अब न्याय व्यवस्था को 20वीं सदी की कार्यप्रणाली से बाहर निकालकर 21वीं सदी की तकनीक से जोड़ना ज़रूरी है।


CJI सूर्य कांत द्वारा सुप्रीम कोर्ट में AI डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च

🧠 1. AI-Powered Digital Judicial Platform: अब सिस्टम खुद बोलेगा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा लॉन्च किया गया यह AI-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म भारतीय अदालतों को एक Unified Judicial Network में जोड़ देगा।

🔹 इस प्लेटफॉर्म की प्रमुख खूबियाँ:

  • ऑटो-अपडेट केस स्टेटस
    जैसे ही ट्रायल कोर्ट या हाई कोर्ट कोई आदेश देगा, वह स्वतः सुप्रीम कोर्ट सिस्टम में अपडेट हो जाएगा।
  • Real-Time Case Tracking
    अब जजों के पास लाइव डेटा होगा कि किस कोर्ट में कितने मामले लंबित हैं और कहां सबसे ज्यादा देरी हो रही है।
  • Central Repository System
    देशभर की अदालतों का डेटा एक ही डिजिटल छत के नीचे उपलब्ध रहेगा।

📌 सीधा फायदा: जिन मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है, वे तुरंत चिन्हित होंगे और सुनवाई तेज़ की जा सकेगी।


💳 2. Digital Payment System (IOPS): लाइन में लगने का झंझट खत्म

कोर्ट फीस जमा करने के लिए लंबी लाइनों और कैश की समस्या अब बीते दौर की बात होगी।

🔹 Integrated Online Payment System (IOPS) के तहत:

  • कोर्ट फीस
  • Advocate-on-Record (AoR) परीक्षा शुल्क
  • सुप्रीम कोर्ट की क्रेच (Creche) सुविधा शुल्क

अब सब कुछ ऑनलाइन और कैशलेस तरीके से किया जा सकेगा।

📌 सीधा फायदा: वकीलों, वादियों और स्टाफ का समय बचेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।


🚗 3. PARK App: सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा भी अब स्मार्ट

सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को भी टेक्नोलॉजी से लैस किया गया है।

🔹 PARK (Park Authorisation Record Keeper) ऐप:

  • वाहनों की एंट्री के लिए ऑनलाइन अनुमति
  • मैनुअल पास और फिजिकल वेरिफिकेशन की झंझट खत्म
  • डिजिटल रिकॉर्ड से सुरक्षा निगरानी और मजबूत

📌 सीधा फायदा: सुरक्षा व्यवस्था तेज़, सटीक और पूरी तरह ट्रैक-योग्य होगी।


👥 आम आदमी के लिए क्या बदलेगा?

यह सुधार सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं है, इसका असर हर नागरिक तक पहुँचेगा।

  • तेज़ सुनवाई
  • कम तारीखें
  • केस की स्पष्ट जानकारी
  • कम भ्रष्टाचार और ज्यादा पारदर्शिता

AI यह भी एनालिसिस करेगा कि किस तरह के केस सबसे ज़्यादा समय ले रहे हैं, ताकि भविष्य में उनके लिए अलग समाधान निकाले जा सकें।


🗣️ CJI सूर्य कांत का स्पष्ट संदेश

मुख्य न्यायाधीश ने कहा:

“हम परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बढ़ाने और केस पेंडेंसी घटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दोहन कर रहे हैं। यह तकनीक न्यायाधीशों की सहायता करेगी, उनका स्थान नहीं लेगी।”

यह बयान साफ करता है कि AI न्याय का सहायक है, विकल्प नहीं।


🔮 भारतीय न्याय प्रणाली का भविष्य

यह पहल संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में—

  • ई-कोर्ट्स और मजबूत होंगी
  • पेपरलेस जस्टिस सिस्टम बढ़ेगा
  • आम नागरिक का भरोसा न्यायपालिका में और मजबूत होगा

साफ है, सुप्रीम कोर्ट अब सिर्फ फैसले नहीं, भविष्य की दिशा भी तय कर रहा है।

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