देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में जब पर्यावरण संरक्षण की बात होती है, तो अक्सर सरकारी योजनाओं का जिक्र आता है। लेकिन जनपद उत्तरकाशी के ग्राम सभा झाला में चल रहा थैंक यू नेचर अभियान इस सोच को बदल रहा है। यह पहल अब केवल एक स्वच्छता कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि जनभागीदारी से उपजा एक जीवंत आंदोलन बनती जा रही है।
शुरुआत युवाओं ने की थी, लेकिन अब गांव की महिलाएं भी पूरे संकल्प के साथ इस मुहिम में उतर चुकी हैं। महिलाओं की भागीदारी ने थैंक यू नेचर को सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बना दिया है।
महिलाओं ने संभाली स्वच्छता की कमान

ग्राम झाला में भागीरथी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने हाल ही में थैंक यू नेचर अभियान के अंतर्गत एक विशेष स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान गांव के मंदिर प्रांगण, सार्वजनिक रास्तों और आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई की गई।
महिलाओं ने न केवल कचरा एकत्र किया, बल्कि प्लास्टिक अपशिष्ट को अलग कर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित भी किया। यह पहल दिखाती है कि स्वच्छता केवल दिखावे का काम नहीं, बल्कि समझ और जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है।
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साफ संदेश: स्वच्छता सरकार नहीं, समाज की जिम्मेदारी

इस अभियान के दौरान महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि:
- स्वच्छता किसी एक विभाग का काम नहीं
- पर्यावरण संरक्षण रोजमर्रा की आदतों से जुड़ा है
- गांव की सुंदरता और स्वास्थ्य सबकी साझा जिम्मेदारी है
यही सोच थैंक यू नेचर को एक साधारण सफाई अभियान से आगे ले जाकर सामूहिक चेतना का प्रतीक बना रही है।
युवाओं से शुरू हुई पहल, गांव की पहचान बनी

गौरतलब है कि थैंक यू नेचर अभियान की शुरुआत गांव के युवा अभिषेक रौतेला ने की थी। वर्तमान में ग्राम प्रधान के रूप में वे इस संकल्प को और मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह अभियान धीरे-धीरे ग्राम झाला की पहचान बन गया।
इस पहल को तब राष्ट्रीय पहचान मिली, जब इसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में किया। यह क्षण गांव के लिए सम्मान और आत्मविश्वास दोनों लेकर आया।
महिलाएं, युवा और बच्चे—तीनों की साझेदारी

आज ग्राम झाला में थैंक यू नेचर अभियान की सबसे बड़ी ताकत उसकी सामूहिक भागीदारी है।
- युवा जागरूकता और नेतृत्व संभाल रहे हैं
- महिलाएं सफाई और कचरा प्रबंधन को दिशा दे रही हैं
- बच्चे पर्यावरण संरक्षण को आदत के रूप में सीख रहे हैं
यह सामूहिक प्रयास गांव को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-संवेदनशील मॉडल ग्राम की ओर ले जा रहा है।
अन्य गांवों के लिए बनता उदाहरण
भागीरथी महिला स्वयं सहायता समूह की यह पहल अब आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन रही है। स्थानीय लोग मानते हैं कि अगर इसी तरह थैंक यू नेचर जैसे अभियानों को बढ़ावा मिले, तो ग्रामीण भारत में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा बदलाव संभव है।
यह पहल साबित करती है कि बड़े परिवर्तन के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती—सामूहिक इच्छाशक्ति ही सबसे बड़ा साधन है।
ग्राम झाला की यह कहानी बताती है कि जब महिलाएं, युवा और बच्चे एक साथ जिम्मेदारी उठाते हैं, तो बदलाव स्थायी होता है। थैंक यू नेचर अब सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि उस सोच का नाम है जो गांवों को स्वच्छ और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बना रही है।
अब सवाल यह है—क्या देश के अन्य गांव भी इस रास्ते पर चलने के लिए तैयार हैं?
Amitendra Sharma is a digital news editor and media professional with a strong focus on credible journalism, public-interest reporting, and real-time news coverage. He actively works on delivering accurate, fact-checked, and reader-centric news related to Uttarakhand, governance, weather updates, and socio-political developments.