ऋषिकेश/देहरादून। आध्यात्मिक चेतना, सेवा-भाव और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को समर्पित स्व. नित्यानन्द स्वामी की 97वीं जयंती पर उत्तराखंड में एक भव्य एवं प्रेरणादायी समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन परमार्थ निकेतन में हुआ, जहां संत समाज, शिक्षाविद्, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व एक मंच पर एकत्र हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य स्व. नित्यानन्द स्वामी के विचारों को वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिक बनाते हुए उत्तराखंड में सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करना रहा।
आध्यात्मिक नेतृत्व और उत्तराखंड की वैचारिक विरासत

समारोह में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य और उद्बोधन ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को स्व. नित्यानन्द स्वामी के रूप में ऐसा नेतृत्व मिला, जिसने सत्ता को सेवा और विचार को आचरण में बदलकर दिखाया। उनका जीवन सादगी, सत्य और समर्पण का उदाहरण था। उन्होंने आध्यात्मिकता को केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज, राष्ट्र और प्रकृति से जोड़कर प्रस्तुत किया।
स्वामी चिदानन्द ने कहा कि आज के समय में उत्तराखंड को ऐसे ही मूल्यों की आवश्यकता है, जहां विकास और संवेदना साथ-साथ आगे बढ़ें। युवाओं के लिए स्व. नित्यानन्द स्वामी का जीवन एक प्रेरक मार्गदर्शक है, जो उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा दिखाता है।
मुख्यमंत्री का संदेश और उत्तराखंड का समकालीन दृष्टिकोण

कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सहभाग किया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि स्व. नित्यानन्द स्वामी का जीवन उत्तराखंड की राजनीति और सामाजिक चेतना के लिए एक नैतिक मानक रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब उत्तराखंड विकास के नए चरण में प्रवेश कर रहा है, तब स्वामी जी के विचार शासन, समाज और नीति-निर्माण के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।
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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल भौगोलिक या पर्यटन के कारण नहीं, बल्कि यहां की आध्यात्मिक परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सेवा संस्कृति के कारण है, जिसे स्व. नित्यानन्द स्वामी ने मजबूती दी।
सम्मान समारोह: सेवा को मिला सार्वजनिक सम्मान

इस अवसर पर स्व. नित्यानन्द स्वामी की स्मृति में उत्तराखंड और देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग, पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति, कला, समाज सेवा और जनसेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को अलंकरण प्रदान किए गए।
सम्मान प्राप्त करने वालों में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट को स्वच्छ राजनीतिज्ञ सम्मान, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरातत्वविद् पद्मश्री डा यशोधर मठपाल को उत्तराखंड गौरव सम्मान, पद्मश्री डा आर के जैन को चिकित्सा सेवा अलंकरण, उद्योग क्षेत्र में योगदान के लिए अशोक विंडलास, संस्कृति संरक्षण के लिए सुरेश जोशी, शिक्षा क्षेत्र में डा कमल घनशाला, व्यापार क्षेत्र में अनिल गुप्ता और सुरेश गुप्ता, समाज सेवा के लिए प्रेम प्रकाश शर्मा, पर्यावरण संरक्षण के लिए मोहन चंद्र कांडपाल और ललित कला के लिए दिनेश लाल को सम्मानित किया गया।
उत्तराखंड में सेवा और संस्कार का संदेश

सम्मानित व्यक्तित्वों ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को और मजबूत करने वाला है। उन्होंने स्व. नित्यानन्द स्वामी के आदर्शों को अपने कार्यों में आत्मसात करने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में संत समाज और वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड की आत्मा सेवा और करुणा में बसती है। जब समाज के विभिन्न वर्ग एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्य करते हैं, तभी वास्तविक विकास संभव होता है।
संगठनात्मक सहभाग और सामूहिक संकल्प

इस विशेष आयोजन में आयोजन समिति के अध्यक्ष डा आर के बक्शी, उपाध्यक्ष ज्योत्सना शर्मा, सचिव राहुल अग्रवाल, संरक्षक डा एस फारूख सहित युवा संगठन के पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन का संचालन अनुशासित और गरिमामय ढंग से किया गया, जिससे पूरे कार्यक्रम में एक सकारात्मक ऊर्जा बनी रही।
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समापन: उत्तराखंड के लिए प्रेरक विरासत
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक प्रार्थना और शांति पाठ आयोजित किया गया, जिसमें विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण और उत्तराखंड की समृद्धि की कामना की गई। यह समारोह केवल एक जयंती कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह उत्तराखंड के सामाजिक और आध्यात्मिक भविष्य के लिए एक साझा संकल्प बनकर उभरा।
स्व. नित्यानन्द स्वामी की 97वीं जयंती ने यह संदेश स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की शक्ति उसके संस्कार, सेवा-भाव और नैतिक नेतृत्व में निहित है। उनके विचार आज भी उत्तराखंड को सही दिशा देने में सक्षम हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
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