पावर एक्शन 2026: उत्तराखंड में संदिग्धों पर सबसे बड़ा पुलिस सत्यापन अभियान, DGP दीपम सेठ का सख्त निर्देश

कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी पहल

उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री दीपम सेठ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में व्यापक और सघन पुलिस सत्यापन अभियान शुरू कर दिया गया है। यह अभियान केवल औपचारिक जांच नहीं, बल्कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक निर्णायक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

इस विशेष मुहिम का उद्देश्य प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, घुसपैठियों, बांग्लादेशी नागरिकों, वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद भी ठहरे विदेशियों और अन्य संदिग्ध बाहरी व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

कहाँ-कहाँ होगा सत्यापन? हर सेक्टर रडार पर

इस पुलिस सत्यापन अभियान के तहत उत्तराखंड के सभी जनपदों में सर्किल, थाना और चौकी स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। विशेष फोकस इन स्थानों पर रहेगा:

  • मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट्स
  • किराये के मकान, फ्लैट, PG, हॉस्टल
  • होटल, गेस्ट हाउस, होम-स्टे
  • आश्रम, धर्मशालाएं
  • रेजिडेंशियल कॉलोनियां और इंडस्ट्रियल एरिया

बिना पुलिस सत्यापन के किरायेदारी कराने या संदिग्धों को शरण देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई तय है।

उत्तराखंड पुलिस सत्यापन अभियान

डिलीवरी एजेंट से लेकर कैब ड्राइवर तक – कोई भी बाहर नहीं

इस बार पुलिस सत्यापन अभियान की परिधि को काफी विस्तार दिया गया है। Amazon, Zomato, Blinkit जैसी ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेवाओं से जुड़े एजेंट,
कैब ड्राइवर,
सिक्योरिटी एजेंसी स्टाफ,
इंडस्ट्रियल एरिया के ठेकेदार —
सभी का विशेष सत्यापन किया जाएगा।

यह फैसला सीधे तौर पर शहरी सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

हाई-टेक निगरानी: NATGRID से CCTNS तक

संदिग्धों की पहचान के लिए उत्तराखंड पुलिस आधुनिक तकनीकी साधनों और केंद्रीय डाटाबेस का इस्तेमाल कर रही है, जिनमें शामिल हैं:

  • NATGRID (National Intelligence Grid)
  • CCTNS
  • ICJS
  • अन्य राज्य व केंद्र सरकार के सुरक्षा पोर्टल

इन प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए डेटा मिलान, प्रोफाइल एनालिसिस और रियल-टाइम अलर्ट पर काम किया जा रहा है।

CCTV, जिम, स्पा, कोचिंग सेंटर—सबकी होगी जांच

पुलिस सत्यापन अभियान के दौरान प्रदेश के:

  • मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
  • जिम, स्पा, ब्यूटी पार्लर
  • स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय
  • कोचिंग संस्थान
  • ट्रांसपोर्ट एजेंसियां

में हाई-रेजोल्यूशन CCTV कैमरों की उपलब्धता, कार्यशील स्थिति और रिकॉर्डिंग सिस्टम की जांच की जाएगी।
साथ ही तैनात सुरक्षा गार्ड्स का चरित्र सत्यापन और सुरक्षा ब्रीफिंग भी अनिवार्य की गई है।

वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं सर्वोच्च प्राथमिकता

उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस पुलिस सत्यापन अभियान का मुख्य उद्देश्य भय-मुक्त वातावरण बनाना है।
विशेष रूप से:

  • एकल नागरिक
  • वरिष्ठ नागरिक
  • महिलाओं की सुरक्षा

को ध्यान में रखते हुए उनके घरों में काम करने वाले घरेलू सहायकों, केयर-टेकर, ड्राइवर और अन्य स्टाफ का अनिवार्य सत्यापन कराया जाएगा।

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STF-SOG-LIU की संयुक्त कार्रवाई, जवाबदेही तय

इस पूरे अभियान को जनपदीय पुलिस, STF, SOG और LIU मिलकर अंजाम दे रही हैं।
हर थाना स्तर पर विशेष फील्ड टीमें बनाई गई हैं और
CO से लेकर IG रेंज स्तर तक नियमित समीक्षा व्यवस्था लागू की गई है।

DGP दीपम सेठ ने साफ कहा है:

“पूरे अभियान की मॉनिटरिंग के साथ-साथ हर स्तर पर जवाबदेही तय की गई है। आपराधिक तत्वों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।”

क्यों अहम है यह पुलिस सत्यापन अभियान? 

उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती और पर्यटन प्रधान राज्य में
बिना सत्यापन रह रहे लोगों की मौजूदगी
आतंरिक सुरक्षा, महिला सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

यह अभियान स्पष्ट संकेत देता है कि
👉 राज्य सरकार और पुलिस अब “Zero-Tolerance Mode” में हैं।

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