* उत्तराखंड में UCC संशोधन अध्यादेश 2026 लागू: ‘विधवा’ नहीं अब कहेंगे ‘जीवनसाथी’, विवाह और तलाक के नियमों में बड़ा फेरबदल

देहरादून

उत्तराखंड सरकार ने अपने ऐतिहासिक ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) कानून को और अधिक धारदार और व्यावहारिक बना दिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की मंजूरी मिलते ही ‘समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

इस संशोधन का सीधा असर आम जनता, खासकर विवाह पंजीकरण और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों पर पड़ेगा। सरकार का स्पष्ट संदेश है—कानून केवल कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी दिखना चाहिए। नए अध्यादेश में पुराने अंग्रेजी कानूनों (IPC/CrPC) को हटाकर नए भारतीय कानूनों (BNS/BNSS) को शामिल किया गया है, साथ ही प्रशासनिक लेटलतीफी पर भी लगाम लगाई गई है।
आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि इस संशोधन के बाद आपके लिए क्या बदल गया है।

उत्तराखंड से बाहर रहने वालों पर भी लागू होगा UCC, लिव-इन से लेकर डिवोर्स तक क्या नियम- बड़े पॉइंट

ये हैं वो 9 बड़े बदलाव जो आपको जानने चाहिए:

  • संशोधित अध्यादेश के जरिए संहिता में प्रक्रियात्मक और दंडात्मक (Penal) सुधार किए गए हैं, ताकि सिस्टम पारदर्शी रहे:
    * पुराने कानून बाहर, नए अंदर: अब आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 और IPC की जगह क्रमशः ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023’ और ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ के प्रावधान लागू होंगे।
    * पहचान छिपाई तो शादी रद्द: अगर विवाह के समय किसी ने अपनी असली पहचान छिपाई या गलत जानकारी दी, तो इसे अब ‘विवाह निरस्तीकरण’ (Annulment) का ठोस आधार माना जाएगा। यानी झूठ की बुनियाद पर टिकी शादी अब कानूनन मान्य नहीं होगी।
    * लिव-इन का ‘ब्रेकअप सर्टिफिकेट’: यह एक बड़ा बदलाव है। अब लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने पर रजिस्ट्रार द्वारा आधिकारिक ‘समाप्ति प्रमाण पत्र’ (Termination Certificate) जारी किया जाएगा। इससे भविष्य के विवादों से बचने में मदद मिलेगी।
    * धोखाधड़ी पर सख्त सजा: शादी या लिव-इन संबंधों में अगर कोई बल प्रयोग, दबाव, धोखाधड़ी या गैर-कानूनी तरीका अपनाता है, तो उसके लिए अब कठोर दंड का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है।
    * ‘विधवा’ नहीं, अब ‘जीवनसाथी’: लैंगिक समानता (Gender Equality) की ओर एक बड़ा कदम उठाते हुए अनुसूची-2 में ‘विधवा’ शब्द को हटाकर ‘जीवनसाथी’ (Spouse) शब्द कर दिया गया है। यानी अब कानून की नजर में पति और पत्नी दोनों के अधिकार समान शब्दों में परिभाषित होंगे।
    * अफसरों की लेटलतीफी पर लगाम: अगर उप-पंजीयक (Sub-Registrar) तय समय में काम नहीं करता है, तो फाइल अपने आप (Automatically) बड़े अधिकारी (पंजीयक और पंजीयक जनरल) के पास फॉरवर्ड हो जाएगी। जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
    * रजिस्ट्रेशन रद्द करने की पावर: विवाह, तलाक, लिव-इन या उत्तराधिकार के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की शक्ति अब ‘पंजीयक जनरल’ को दे दी गई है।
    * अधिकारियों को अपील का हक: अगर उप-पंजीयक पर कोई दंड लगता है, तो उसे अपील करने का अधिकार होगा। वहीं, दंड की वसूली भू-राजस्व (Land Revenue) की तरह सख्ती से की जाएगी।
    * अपर सचिव को पावर: धारा 12 के तहत अब ‘सचिव’ के स्थान पर ‘अपर सचिव’ स्तर के अधिकारी को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है, जिससे काम में तेजी आएगी

 

यह संशोधन केवल कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि UCC को “टूथलेस टाइगर” बनने से बचाने की कवायद है। ‘पहचान छिपाने’ वाले क्लॉज से “लव जिहाद” जैसे मामलों में कानूनी स्पष्टता आएगी, वहीं लिव-इन के लिए टर्मिनेशन सर्टिफिकेट की व्यवस्था युवाओं के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। धामी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देवभूमि में कानून का राज सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के साथ चलेगा।

 

UCC ammendment Uttarakhand

एक साल बेमिसाल: UCC पर सीएम धामी का संदेश

​उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू हुए एक वर्ष पूर्ण हो चुका है। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के सपनों को साकार करते हुए और आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में, देवभूमि उत्तराखंड ने समान अधिकार और समान न्याय की दिशा में यह ऐतिहासिक सफर तय किया है।

​इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों के नाम एक भावुक संदेश जारी किया है:

“देवभूमि के मेरे समस्त परिवारजनों, आज का दिन हमारे लिए केवल एक कानून के एक वर्ष पूरे होने का नहीं, बल्कि ‘समानता’ और ‘समरसता’ के उस संकल्प के सिद्ध होने का पर्व है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में हमने यह साबित किया है कि विकास की नींव ‘समान न्याय’ पर ही रखी जा सकती है।

पिछले एक वर्ष में इस संहिता ने मातृशक्ति के अधिकारों को सुरक्षित किया है। लिव-इन संबंधों में पारदर्शिता हो या विवाह-विच्छेद में समानता, हमने हर नागरिक की गरिमा सुनिश्चित की है। इस ऐतिहासिक बदलाव को स्वीकारने के लिए मैं आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ। आइए, हम मिलकर इस ‘समानता की मशाल’ को और प्रज्वलित करें।”

2 thoughts on “* उत्तराखंड में UCC संशोधन अध्यादेश 2026 लागू: ‘विधवा’ नहीं अब कहेंगे ‘जीवनसाथी’, विवाह और तलाक के नियमों में बड़ा फेरबदल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *