देवभूमि में संवैधानिक गरिमा का क्षण
उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासन में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो केवल औपचारिक नहीं, बल्कि गहरे संवैधानिक और राजनीतिक संकेत भी अपने साथ लाते हैं। उपराष्ट्रपति का किसी राज्य में आगमन उसी श्रेणी में आता है। यह न केवल केंद्र–राज्य संबंधों की तस्वीर पेश करता है, बल्कि उस राज्य के राष्ट्रीय महत्व को भी रेखांकित करता है।
इसी क्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के देवभूमि उत्तराखंड आगमन पर जॉलीग्रांट हवाई अड्डे पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका औपचारिक स्वागत किया। यह दृश्य केवल प्रोटोकॉल का पालन नहीं था, बल्कि उत्तराखंड की संवैधानिक संस्कृति और राजनीतिक शिष्टाचार का प्रतिबिंब भी था।
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जॉलीग्रांट हवाई अड्डा: स्वागत का साक्षी
देहरादून स्थित जॉलीग्रांट हवाई अड्डा एक बार फिर राज्य के उच्चस्तरीय संवैधानिक आयोजन का केंद्र बना। उपराष्ट्रपति के आगमन पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार राज्यपाल और मुख्यमंत्री स्वयं हवाई अड्डे पर उपस्थित रहे।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, जिनका सैन्य और प्रशासनिक अनुभव देश के शीर्ष संस्थानों से जुड़ा रहा है, ने उपराष्ट्रपति का आत्मीय स्वागत किया। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह दौरा राज्य सरकार के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
उपराष्ट्रपति का पद केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि राज्यसभा के सभापति के रूप में विधायी प्रक्रिया का केंद्रीय स्तंभ है। ऐसे में उनका उत्तराखंड आगमन कई स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह दौरा राज्य के शैक्षणिक, सामाजिक और प्रशासनिक कार्यक्रमों से जुड़ा हो सकता है। साथ ही, उत्तराखंड जैसे सीमांत और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य में उपराष्ट्रपति की उपस्थिति राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की भूमिका को रेखांकित करती है।
इस स्वागत समारोह में राज्यपाल और मुख्यमंत्री की संयुक्त मौजूदगी अपने आप में एक संदेश देती है। उत्तराखंड में संवैधानिक पदों और निर्वाचित सरकार के बीच समन्वय को अक्सर एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जाता रहा है।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का व्यक्तित्व अनुशासन और संवैधानिक मर्यादा का प्रतीक माना जाता है, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी युवा नेतृत्व और राजनीतिक सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। उपराष्ट्रपति आगमन पर दोनों की संयुक्त उपस्थिति यह दर्शाती है कि राज्य अपने संवैधानिक अतिथियों के स्वागत में किसी भी स्तर पर कोई कमी नहीं छोड़ता।
देवभूमि उत्तराखंड: बढ़ता राष्ट्रीय महत्व
उत्तराखंड को अक्सर धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य के संदर्भ में देखा जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में इसका राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व भी तेजी से बढ़ा है। चारधाम परियोजना, सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों में राज्य की भूमिका लगातार मजबूत हुई है।
ऐसे में उपराष्ट्रपति आगमन को केवल शिष्टाचार यात्रा नहीं माना जा सकता। यह इस बात का संकेत भी है कि केंद्र सरकार और शीर्ष संवैधानिक संस्थान उत्तराखंड को गंभीरता से देख रहे हैं।
प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था
उपराष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए जॉलीग्रांट हवाई अड्डे और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राज्य पुलिस, विशेष सुरक्षा एजेंसियों और जिला प्रशासन के बीच पूर्ण समन्वय रखा गया।
यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए थी कि उपराष्ट्रपति का आगमन पूरी तरह सुरक्षित, गरिमामय और समयबद्ध तरीके से संपन्न हो।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार हाल के वर्षों में केंद्र के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में सफल रही है। उपराष्ट्रपति आगमन इसी समन्वय का एक औपचारिक लेकिन महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।
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