1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर कानून के तहत आयकर विभाग को जांच और तलाशी के दौरान ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट, क्लाउड स्टोरेज और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचने का कानूनी अधिकार मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम कर चोरी और अघोषित आय पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उठाया गया है।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)किन परिस्थितियों में होगा इस्तेमाल
यह अधिकार किसी भी सामान्य नागरिक की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नहीं है। कानून में साफ किया गया है कि इन शक्तियों का इस्तेमाल केवल तभी किया जाएगा जब किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ ठोस संदेह के आधार पर सर्च या इन्वेस्टिगेशन चल रही हो। बिना कारण या पूर्व सूचना के डिजिटल डेटा तक पहुंच नहीं बनाई जा सकेगी।
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किन डिजिटल प्लेटफॉर्म तक होगी पहुंच
नए प्रावधान के तहत आयकर अधिकारी ईमेल अकाउंट, सोशल मीडिया प्रोफाइल, डिजिटल वॉलेट, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट अकाउंट, क्लाउड ड्राइव और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच कर सकेंगे। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं आय या संपत्ति को डिजिटल माध्यमों से छुपाया तो नहीं जा रहा।
सरकार का पक्ष
सरकार का तर्क है कि आज के समय में कर चोरी के तरीके भी डिजिटल हो चुके हैं। ऐसे में पुराने कानून डिजिटल साक्ष्यों तक पहुंच के मामले में सीमित थे। नया कानून जांच एजेंसियों को आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाएगा, साथ ही कानून के दायरे में रहते हुए कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
निजता को लेकर क्या कहा गया
आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था ‘ब्लैंकेट सर्विलांस’ नहीं है। हर कार्रवाई वैध अनुमति, रिकॉर्डेड कारण और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होगी। आम करदाताओं की निजता का उल्लंघन न हो, इसके लिए आंतरिक गाइडलाइंस और जवाबदेही तंत्र भी तय किए गए हैं।
करदाताओं के लिए क्या मायने
ईमानदारी से रिटर्न दाखिल करने वाले और पारदर्शी लेनदेन रखने वाले करदाताओं पर इस प्रावधान का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन डिजिटल माध्यमों से आय छुपाने या फर्जी लेनदेन करने वालों पर शिकंजा कसना अब पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा।

