उत्तराखंड में लागू हुआ यूनिफॉर्म सिविल कोड: शादी, तलाक, लिव-इन और विरासत के नियमों में बड़ा बदलाव, जानिए UCC की 10 सबसे अहम बातें

भारत में लंबे समय से चर्चा में रहा यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code – UCC) आखिरकार उत्तराखंड में लागू हो गया है। इसी के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जिसने सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।

इस कानून के लागू होने के बाद अब राज्य में शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, विरासत, बहुविवाह और हलाला जैसे कई विषयों पर एक समान कानूनी ढांचा लागू होगा।

उत्तराखंड सरकार का दावा है कि यह कानून लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और पारदर्शी पारिवारिक व्यवस्था को मजबूत करेगा। वहीं राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस कानून को लेकर व्यापक चर्चा भी शुरू हो गई है।

यूसीसी के लागू होने के साथ ही कई पुराने व्यक्तिगत कानूनों में बदलाव आए हैं। खासतौर पर मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़ी कुछ प्रथाओं जैसे बहुविवाह और हलाला पर रोक तथा सभी धर्मों के लिए समान नियम लागू होने को इस कानून का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि उत्तराखंड में लागू यूसीसी के तहत क्या-क्या नियम हैं और इसका आम नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।


क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)?

यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है कि किसी राज्य या देश में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए पारिवारिक मामलों में एक समान कानून लागू हो।

इन मामलों में मुख्य रूप से शामिल होते हैं—

  • विवाह
  • तलाक
  • विरासत
  • गोद लेना
  • भरण-पोषण

अब तक भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू थे। लेकिन यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में इन मामलों में एक समान नियम लागू हो जाएंगे।

सरकार का कहना है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसमें देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही गई है।


यूसीसी के दायरे में कौन आएगा?

उत्तराखंड में लागू यूसीसी का दायरा काफी व्यापक रखा गया है।

यह कानून लागू होगा—

  • उत्तराखंड राज्य के सभी नागरिकों पर
  • राज्य से बाहर रहने वाले उत्तराखंड के निवासियों पर भी

हालांकि इसमें अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को इस कानून से बाहर रखा गया है।

सरकार का तर्क है कि जनजातीय समुदायों की अपनी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति-रिवाज होते हैं, इसलिए उन्हें फिलहाल इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।


शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए नए नियम

यूसीसी लागू होने के बाद अब उत्तराखंड में हर शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

सरकार ने इसके लिए एक महत्वपूर्ण कट-ऑफ तारीख तय की है—

26 मार्च 2010

इस तारीख से लेकर यूसीसी लागू होने तक हुई सभी शादियों का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।

मुख्य नियम

  • 26 मार्च 2010 से अब तक हुई शादियों का रजिस्ट्रेशन 6 महीने के भीतर कराना होगा।
  • यूसीसी लागू होने के बाद होने वाली शादियों का रजिस्ट्रेशन 60 दिन के भीतर करना अनिवार्य होगा।

सरकार का मानना है कि इससे बाल विवाह, धोखाधड़ी वाले विवाह और बहुविवाह जैसी समस्याओं पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा।


लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

यूसीसी का एक बड़ा और चर्चित प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा है।

अब उत्तराखंड में रहने वाले किसी भी युवक-युवती को यदि वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं, तो उसे आधिकारिक रूप से रजिस्टर कराना होगा।

मुख्य नियम

  • यूसीसी लागू होने से पहले से चल रहे लिव-इन रिलेशन को एक महीने के भीतर रजिस्टर करना होगा।
  • यूसीसी लागू होने के बाद बनने वाले लिव-इन संबंधों को रिलेशनशिप शुरू होने के एक महीने के भीतर रजिस्टर करना होगा।

इसके अलावा लिव-इन संबंध में प्रवेश करने से पहले माता-पिता को भी सूचना देने का प्रावधान रखा गया है।


लिव-इन में गर्भावस्था होने पर क्या होगा?

यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े बच्चों के अधिकारों को भी स्पष्ट किया गया है।

यदि लिव-इन संबंध में महिला गर्भवती हो जाती है, तो—

  • इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को देना अनिवार्य होगा
  • बच्चे के जन्म के 30 दिन के भीतर रिकॉर्ड अपडेट करना होगा

इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे के कानूनी अधिकार सुरक्षित रहें।


बहुविवाह और हलाला पर रोक

यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में बहुविवाह और हलाला जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इसका मतलब है—

  • कोई व्यक्ति एक से अधिक शादी नहीं कर सकता
  • हलाला जैसी प्रथाएं कानूनी रूप से मान्य नहीं होंगी

सरकार का दावा है कि यह कदम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।


तलाक के लिए नए नियम

यूसीसी में तलाक से जुड़े नियमों को भी व्यवस्थित किया गया है।

अब तलाक के मामलों में रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजी प्रक्रिया अनिवार्य होगी।

तलाक के आवेदन के समय निम्न दस्तावेज जरूरी होंगे—

  • विवाह रजिस्ट्रेशन का प्रमाण
  • तलाक की डिक्री का विवरण
  • अदालत का केस नंबर
  • अंतिम आदेश की तारीख
  • बच्चों का विवरण
  • कोर्ट के अंतिम आदेश की कॉपी

इससे तलाक की प्रक्रिया कानूनी रूप से पारदर्शी और व्यवस्थित हो सकेगी।


संपत्ति में बेटा-बेटी को बराबर अधिकार

यूसीसी का एक महत्वपूर्ण प्रावधान संपत्ति में लैंगिक समानता से जुड़ा है।

अब उत्तराखंड में—

  • बेटा और बेटी दोनों को संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलेगा
  • किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव मान्य नहीं होगा

इसके अलावा लिव-इन या सरोगेसी से जन्मे बच्चों को भी समान संपत्ति अधिकार दिए गए हैं।


* उत्तराखंड में UCC संशोधन अध्यादेश 2026 लागू:विधवा नहीं अब कहेंगे जीवनसाथी, विवाह और तलाक के नियमों में बड़ा फेरबदल

वसीयत बनाने के नए विकल्प

यूसीसी के तहत वसीयत बनाने के लिए कई नए विकल्प भी दिए गए हैं।

अब नागरिक तीन तरीकों से वसीयत बना सकते हैं—

  1. ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरकर
  2. हस्तलिखित या टाइप्ड दस्तावेज अपलोड करके
  3. तीन मिनट का वीडियो रिकॉर्ड करके

इसके अलावा सैनिकों के लिए ‘प्रिविलेज्ड वसीयत’ का प्रावधान किया गया है।

इस व्यवस्था के तहत सक्रिय सेवा में तैनात सैनिक मौखिक या हस्तलिखित निर्देश के माध्यम से भी वसीयत बना सकते हैं।


सभी धर्मों के लिए शादी की एक समान उम्र

यूसीसी के तहत अब उत्तराखंड में सभी धर्मों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र समान रखी गई है।

नियम

  • पुरुषों के लिए न्यूनतम उम्र – 21 वर्ष
  • महिलाओं के लिए न्यूनतम उम्र – 18 वर्ष

इससे पहले अलग-अलग समुदायों में अलग-अलग परंपराओं के अनुसार विवाह होते थे।


रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल

सरकार ने यूसीसी को लागू करने के लिए एक डिजिटल पोर्टल भी तैयार किया है।

नागरिकों को शादी या लिव-इन रिलेशनशिप रजिस्टर करने के लिए इस पोर्टल पर आवेदन करना होगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए वेबसाइट है:

ucc.uk.gov.in

इस पोर्टल के जरिए—

  • विवाह रजिस्ट्रेशन
  • लिव-इन रजिस्ट्रेशन
  • वसीयत रजिस्ट्रेशन

जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।


यूसीसी लागू होने की पूरी टाइमलाइन

उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी हुई।

महत्वपूर्ण घटनाएं

  • 27 मई 2022 – विशेषज्ञ समिति का गठन
  • 02 फरवरी 2024 – समिति ने रिपोर्ट सौंपी
  • 08 मार्च 2024 – विधानसभा में विधेयक पारित
  • 12 मार्च 2024 – राष्ट्रपति की मंजूरी
  • 20 जनवरी 2025 – नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी
  • इसके बाद राज्य में आधिकारिक रूप से यूसीसी लागू किया गया।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड भारतीय कानूनी व्यवस्था में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

यह कानून न केवल समान नागरिक अधिकारों और लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

हालांकि इस कानून को लेकर सामाजिक और राजनीतिक बहस जारी है, लेकिन इतना तय है कि यूसीसी के लागू होने के बाद उत्तराखंड में पारिवारिक कानूनों की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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