प्रकाश पर्व पर राज्यपाल का संदेश, गुरुद्वारा में की अरदास

गुरुद्वारा हरकिशन साहिब में प्रकाश पर्व की श्रद्धा

देहरादून के पटेल नगर स्थित गुरुद्वारा हरकिशन साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिला। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुद्वारे में मत्था टेककर देश और प्रदेश के लिए सुख, शांति और खुशहाली की अरदास की। इस मौके पर सिख समुदाय में उत्साह और आस्था का भाव स्पष्ट रूप से झलका।


गुरु गोबिंद सिंह का जीवन: साहस, समानता और सेवा

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु गोबिंद सिंह का जीवन त्याग, समर्पण और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का जीवंत उदाहरण है। उनके विचार सत्य और न्याय की राह दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह की शिक्षाएं समाज को समानता, भाईचारे और मानवता की सेवा से जोड़ती हैं, जो आज के समय में और भी प्रासंगिक हो जाती हैं।


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‘एक ओंकार’ से एकता का संदेश

राज्यपाल ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रथम शब्द ‘एक ओंकार’ पूरी मानवता को एक सूत्र में बांधने का संदेश देता है। गुरवाणी जीवन में कर्म, प्रेम, सेवा और समर्पण का मार्ग दिखाती है। यही संदेश सिख परंपरा को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाता है।


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सरबत दा भला: सामूहिक जिम्मेदारी

राज्यपाल ने ‘सरबत दा भला’ की भावना पर जोर देते हुए कहा कि निस्वार्थ सेवा और सबके कल्याण का संदेश केवल सिख समाज तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक है। इसे व्यवहार में उतारना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, ताकि समाज में सौहार्द और समरसता बनी रहे।


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प्रकाश पर्व और पंजाबी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान

प्रकाश पर्व न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि पंजाबी और सिख समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। इस पर्व के माध्यम से साहस, आत्मसम्मान और सेवा की परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंचती है, जो समाज को मजबूत और एकजुट बनाती है।

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