मुंबई:
पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री और अब साध्वी जीवन जी रहीं ममता कुलकर्णी ने एक बार फिर अपने बयानों से धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। IANS से बातचीत में ममता कुलकर्णी ने न केवल मौजूदा शंकराचार्यों और जगद्गुरुओं पर सवाल उठाए, बल्कि अहंकार, धर्म और त्याग को लेकर भी बेहद तीखे और बेबाक विचार रखे।
ममता कुलकर्णी ने साफ शब्दों में कहा कि
“खुद शंकराचार्यों को ही देख लीजिए, उनमें कितना अहंकार है। अहंकार पहली चीज़ है जिसे छोड़ देना चाहिए।”
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🔥 “सच से बड़ा कोई पुण्य नहीं” – ममता कुलकर्णी
ममता कुलकर्णी बयान में उन्होंने सत्य और धर्म को राजनीति से ऊपर बताते हुए कहा:
“सच से बड़ा कोई पुण्य नहीं है और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं है।
सच ही धर्म है – सत्यम, शिवम, सुंदरम।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके लिए न कोई पार्टी मायने रखती है, न कोई सत्ता:
“इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह बीजेपी है या समाजवादी पार्टी।”
🧘♀️ 25 साल का त्याग, ध्यान और वैराग्य
IANS को दिए गए इंटरव्यू में साध्वी ममता कुलकर्णी ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से त्याग और तपस्या का जीवन जी रही हैं।
“मैं 25 सालों से घर पर यही पहनावा पहन रही थी।
सुबह से रात तक ध्यान, तपस्या, भागवत और पूजा में जीवन समर्पित किया।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि त्याग कपड़ों से नहीं, भीतर से आता है:
“त्याग कपड़ों से नहीं आता; यह अंदर से आता है।
जब मोह से मुक्ति होती है, तभी सच्चा वैराग्य जन्म लेता है।”
⚡ “सैकड़ों जगद्गुरु घूम रहे हैं, पर ज्ञान शून्य हैं”
अपने सबसे विवादित बयान में ममता कुलकर्णी बयान ने मौजूदा धार्मिक नेतृत्व पर सीधा सवाल उठाया।
“आज सैकड़ों लोग खुद को जगद्गुरु कह रहे हैं।
लेकिन ये सैकड़ों जगद्गुरु कहाँ हैं?
मैंने उन्हें खुद देखा है – वे खाली हैं, उन्हें कुछ नहीं पता।”
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कई महामंडलेश्वर और शंकराचार्य देखे हैं, लेकिन उनमें आत्मज्ञान, ध्यान या समाधि की समझ नहीं है।
🧨 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर सीधा हमला
संगम घाट पर हुई एक घटना का ज़िक्र करते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा:
“उन्हें सुप्रीम शंकराचार्य किसने नियुक्त किया?
उनके अहंकार की वजह से मैं उन्हें शंकराचार्य नहीं कहूँगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि
“असली शंकराचार्य 8वीं सदी के थे, जिन्होंने चार पीठों की स्थापना की थी।”
🧠 “मेरी यात्रा अभी शुरू हुई है”
IANS से बातचीत में ममता कुलकर्णी ने यह भी कहा कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा अभी शुरू हुई है:
“मैंने 25 साल एक ही जगह बैठकर ध्यान किया।
अब मैंने जगत को देखना शुरू किया है।”
उन्होंने निश्चलानंद सरस्वती के भाषण का हवाला देते हुए कहा कि आज कई धर्मगुरु केवल नाम के हैं, ज्ञान के नहीं।
🔍 क्यों अहम है यह बयान?
ममता कुलकर्णी बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि:
- उन्होंने सीधे धार्मिक पदों पर सवाल उठाए
- अहंकार बनाम त्याग की बहस छेड़ी
- धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखने की बात कही
- और यह सब IANS जैसे राष्ट्रीय समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा


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