उत्तराखंड SIR की तैयारी तेज: 87% मतदाता मैपिंग पूरी, अप्रैल से शुरू होगा विशेष गहन पुनरीक्षण

उत्तराखंड SIR न्यूज। उत्तराखंड में चुनावी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में आगामी अप्रैल माह से शुरू होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।

उत्तराखण्ड निर्वाचन कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक 87 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि शत-प्रतिशत मैपिंग होने के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और अधिक सुगम हो जाएगी।

देहरादून में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा की और आगामी कार्यक्रम की रणनीति तय की।


उत्तराखंड SIR तैयारी बैठक में राजस्थान और उत्तराखंड निर्वाचन विभाग के अधिकारी

 

राजस्थान से लिया गया अनुभव, साझा किए गए सफल मॉडल

चुनावी प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए उत्तराखंड निर्वाचन विभाग ने एक दिलचस्प पहल की।

हाल ही में राजस्थान में सफलतापूर्वक संपन्न हुए SIR अभियान के अनुभवों को समझने के लिए वहां के अधिकारियों को उत्तराखंड आमंत्रित किया गया।

बैठक में नवीन महाजन, मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान ने विस्तार से बताया कि किस प्रकार राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण को व्यवस्थित तरीके से संपन्न किया गया।

उन्होंने अधिकारियों को बताया कि यदि बूथ स्तर पर सही मैपिंग और डेटा सत्यापन किया जाए तो मतदाता सूची में त्रुटियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


देहरादून में हुई महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक

देहरादून में आयोजित इस बैठक में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक की अध्यक्षता डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड ने की।

बैठक में उन्होंने प्रदेश में चल रहे मतदाता मैपिंग अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य में अब तक 87 प्रतिशत मतदाताओं का बूथ स्तर पर मैपिंग कार्य पूरा हो चुका है

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन बूथों पर मैपिंग की गति अपेक्षाकृत धीमी है, वहां संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट टाइमलाइन देकर कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।


शत-प्रतिशत मैपिंग पर विशेष जोर

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में जोर देकर कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले शत-प्रतिशत मैपिंग बेहद आवश्यक है

यदि सभी मतदाताओं का सही ढंग से मैपिंग और सत्यापन हो जाता है तो मतदाता सूची में निम्न समस्याओं को कम किया जा सकता है:

  • डुप्लीकेट नाम
  • मृत मतदाताओं के नाम
  • स्थानांतरित मतदाताओं की प्रविष्टि
  • गलत पते या बूथ आवंटन

इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हर बूथ पर मैपिंग कार्य को प्राथमिकता से पूरा किया जाए


अप्रैल से शुरू होगा विशेष गहन पुनरीक्षण

निर्वाचन विभाग के अनुसार उत्तराखंड में अप्रैल 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया जाएगा।

इस प्रक्रिया के दौरान:

  • मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन किया जाएगा
  • नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाएगा
  • गलत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाया जाएगा
  • बूथ स्तर पर डेटा का पुनः परीक्षण होगा

यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।


कई वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया बैठक में हिस्सा

इस महत्वपूर्ण बैठक में निर्वाचन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में प्रमुख रूप से उपस्थित अधिकारियों में शामिल थे:

  • डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी
  • प्रकाश चंद्रा, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी
  • किशन सिंह नेगी, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी
  • एमएम तिवारी, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान
  • अभिनव शाह, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून

इसके अतिरिक्त राज्य के सभी जिलों के डिप्टी डीईओ / अपर जिला अधिकारी, तथा नेशनल और स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर्स (NLMT, SLMT) भी इस बैठक में शामिल हुए।


चुनावी पारदर्शिता के लिए अहम कदम

विशेष गहन पुनरीक्षण को लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

भारत में मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करना आवश्यक होता है ताकि हर योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार मिल सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचा जा सके।

**भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत राज्यों में यह प्रक्रिया नियमित रूप से संचालित की जाती है।


प्रशासन की रणनीति: त्रुटिरहित मतदाता सूची

उत्तराखंड निर्वाचन विभाग का लक्ष्य है कि आगामी चुनावों से पहले पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जाए

अधिकारियों का मानना है कि यदि मैपिंग और पुनरीक्षण प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा किया गया तो चुनाव के दौरान कई प्रकार की तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं से बचा जा सकेगा।

इसलिए विभाग बूथ स्तर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है और अधिकारियों को लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश दिए जा रहे हैं।


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आगे क्या होगा

अब राज्य में अगले कुछ सप्ताहों में शेष 13 प्रतिशत मैपिंग कार्य को पूरा करने पर जोर रहेगा।

इसके बाद अप्रैल में शुरू होने वाला विशेष गहन पुनरीक्षण पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा।

यदि यह प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी हो जाती है तो उत्तराखंड में आने वाले चुनावों के लिए एक अधिक सटीक और अद्यतन मतदाता सूची तैयार हो जाएगी।

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