देहरादून के Panacea Hospital में अग्निकांड, दम घुटने से महिला मरीज की मौत; 14 मरीजों को दूसरी जगह किया शिफ्ट

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से बुधवार देर रात एक बेहद चिंताजनक और दर्दनाक खबर सामने आई, जहां शहर के Panacea Hospital में अचानक भीषण आग लग गई। अस्पताल के भीतर उठती लपटों और फैलते धुएं ने कुछ ही मिनटों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अस्पताल के AC सिस्टम में शॉर्ट सर्किट होने के बाद आग लगी, जिसके कारण ICU और अन्य हिस्सों में धुआं तेजी से फैल गया। इस हादसे में दम घुटने से अस्पताल में भर्ती एक महिला मरीज की मौत हो गई, जबकि करीब 14 मरीजों को आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ा।

घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें Panacea Hospital पर पहुंचीं। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत और बचाव अभियान के दौरान अस्पताल परिसर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। मरीजों के परिजनों में भय और गुस्सा दोनों दिखाई दिए। इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों की फायर सेफ्टी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Panacea Hospital के अंदर धुआं फैलते ही मच गई अफरा-तफरी

Panacea Hospital

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक अस्पताल के एक हिस्से से धुआं निकलना शुरू हुआ। कुछ ही देर में धुआं पूरे फ्लोर तक फैल गया, जिससे मरीजों और स्टाफ के बीच दहशत फैल गई। ICU और गंभीर मरीजों वाले वार्ड में हालात ज्यादा चिंताजनक हो गए क्योंकि वहां भर्ती मरीज ऑक्सीजन और अन्य मेडिकल सपोर्ट सिस्टम पर थे।

Panacea Hospital स्टाफ ने पहले अपने स्तर पर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन आग और धुआं बढ़ता देख तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। जैसे-जैसे धुआं फैलता गया, मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया। कई मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की मदद से बाहर लाया गया। इस दौरान एक महिला मरीज की हालत बिगड़ गई और बाद में दम घुटने से उसकी मौत की पुष्टि हुई।

14 मरीजों को दूसरे अस्पतालों में किया गया शिफ्ट

जानकारी के अनुसार हादसे के वक्त Panacea Hospital में करीब 14 मरीज भर्ती थे। आग और धुएं के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत सभी मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने का निर्णय लिया। देर रात तक एंबुलेंस लगातार अस्पताल परिसर से मरीजों को लेकर निकलती रहीं।

राहत की बात यह रही कि समय रहते बाकी मरीजों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि कई मरीजों और उनके परिजनों ने दावा किया कि शुरुआती कुछ मिनटों तक अस्पताल प्रशासन पूरी तरह व्यवस्थित नहीं दिखा और लोगों को सही स्थिति समझने में देर हुई।

AC में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण AC यूनिट में शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अचानक तकनीकी खराबी के बाद आग भड़क गई और देखते ही देखते धुआं पूरे हिस्से में फैल गया। फिलहाल तकनीकी टीम और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में लगातार चलने वाले भारी इलेक्ट्रिकल लोड और मशीनरी के कारण फायर रिस्क काफी बढ़ जाता है। यदि वायरिंग, AC यूनिट और इलेक्ट्रिकल सिस्टम का नियमित ऑडिट न हो तो छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।

मौके पर पहुंचे गढ़वाल कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारी

घटना की गंभीरता को देखते हुए गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय और आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया और राहत कार्यों की जानकारी ली। प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने यह भी जांच के निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम समय पर सक्रिय हुआ या नहीं। यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल में फायर ऑडिट और सुरक्षा मानकों का पालन नियमित रूप से हो रहा था या नहीं।

फायर ब्रिगेड ने कई घंटों बाद पाया आग पर काबू

दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि अस्पताल के भीतर धुआं तेजी से फैल रहा था। मेडिकल उपकरणों और ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम की मौजूदगी के कारण ऑपरेशन बेहद संवेदनशील हो गया था।

फायर टीम ने पहले मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने पर फोकस किया, उसके बाद आग बुझाने की कार्रवाई तेज की गई। देर रात तक अस्पताल परिसर में राहत और जांच अभियान चलता रहा।

अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस हादसे के बाद देहरादून समेत पूरे उत्तराखंड में निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल ऐसी जगह होती है जहां मरीज इलाज और सुरक्षा की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन अगर वहीं सुरक्षा मानकों में कमी हो तो स्थिति बेहद खतरनाक बन जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ICU और क्रिटिकल केयर यूनिट्स में फायर सेफ्टी को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है क्योंकि वहां मरीज खुद अपनी सुरक्षा नहीं कर सकते। ऐसे में अस्पतालों में हाई-क्वालिटी स्मोक कंट्रोल सिस्टम, ऑटोमैटिक अलार्म और इमरजेंसी निकासी व्यवस्था का प्रभावी होना बेहद जरूरी है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे हादसे

देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई अस्पताल अग्निकांड सामने आ चुके हैं, जिनमें ICU में भर्ती मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कई मामलों में शॉर्ट सर्किट और AC यूनिट को आग का कारण बताया गया था। विशेषज्ञ लगातार अस्पतालों में इलेक्ट्रिकल और फायर सेफ्टी ऑडिट को सख्ती से लागू करने की मांग करते रहे हैं।

देहरादून का यह हादसा भी इसी बहस को फिर तेज कर सकता है कि क्या देश के अस्पताल वास्तव में बड़े आपातकालीन हादसों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं या नहीं।

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अब जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जाएगा कि हादसा केवल तकनीकी खराबी का परिणाम था या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही हुई। मृतक महिला मरीज के परिवार में शोक का माहौल है, जबकि बाकी मरीजों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले की कई अहम परतें खोल सकती है। लेकिन इतना साफ है कि देहरादून का यह हादसा अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बन गया है।

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