हेमकुण्ड साहिब यात्रा रवाना: ऋषिकेश में गूंजे ‘जो बोले सो निहाल’, दिल्ली के उपराज्यपाल और स्वामी चिदानंद ने दिखाई हरि झंडी

ऋषिकेश की आध्यात्मिक धरती मंगलवार को उस समय भक्ति, श्रद्धा और राष्ट्रीय एकता के अद्भुत संगम की साक्षी बनी, जब पवित्र हेमकुण्ड साहिब यात्रा के लिये श्रद्धालुओं की संगत को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया गया। गंगा तट पर गूंजती गुरबाणी, “जो बोले सो निहाल” के जयघोष और श्रद्धालुओं की भावनाओं ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस विशेष अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल Taranjit Singh Sandhu और Swami Chidanand Saraswati ने पंच प्यारों का अभिनंदन कर उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ विदाई दी। कार्यक्रम में गुरूद्वारा हेमकुण्ड साहिब प्रबंधन समिति के पदाधिकारी, संत समाज और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

ऋषिकेश से शुरू हुई यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत, सेवा भावना और विविधता में एकता का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर संगत का स्वागत किया जबकि अरदास के बाद यात्रा दल को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया गया। पूरा आयोजन भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा से ओतप्रोत दिखाई दिया।

हेमकुण्ड साहिब को बताया तप, त्याग और साहस की भूमि

हेमकुण्ड साहिब यात्रा

अपने आशीर्वचन में Swami Chidanand Saraswati ने कहा कि हेमकुण्ड साहिब केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि तप, त्याग, सेवा और साहस की दिव्य भूमि है। उन्होंने कहा कि सिखों के दसवें गुरु Guru Gobind Singh का जीवन सम्पूर्ण मानवता के लिये प्रेरणा का स्रोत है। धर्म, न्याय और मानवता की रक्षा के लिये गुरु साहिब ने अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया था और उनका जीवन आज भी साहस और आध्यात्मिक तेज का प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब दुनिया संघर्ष, हिंसा और विभाजन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब गुरु गोबिंद सिंह जी का संदेश पूरी मानवता को जोड़ने, निर्भय बनने और सत्य के लिये खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि हेमकुण्ड यात्रा केवल पहाड़ों की कठिन चढ़ाई नहीं बल्कि आत्मिक यात्रा भी है, जो व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन और ईश्वर के प्रति समर्पण का अनुभव कराती है।

उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने याद किये सिख गुरुओं के बलिदान

दिल्ली के उपराज्यपाल Taranjit Singh Sandhu ने कहा कि हेमकुण्ड साहिब यात्रा भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जहाँ आध्यात्मिकता और वीरता साथ-साथ चलती हैं। उन्होंने सिख गुरुओं के बलिदान को भारत की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि गुरु परंपरा ने देश को साहस, सेवा और मानवता का मार्ग दिखाया है।

उन्होंने विशेष रूप से Guru Tegh Bahadur और Guru Gobind Singh के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि धर्म और मानव अधिकारों की रक्षा के लिये उनका त्याग सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं का संघर्ष केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं था बल्कि सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिये था।

गंगा, गुरबाणी और हिमालय का अद्भुत संगम

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि हेमकुण्ड साहिब की यात्रा भारत की विविधता में एकता की महान परंपरा को मजबूत करती है। हिमालय की गोद में स्थित यह पवित्र धाम श्रद्धालुओं को सेवा, तप, त्याग और ईश्वर से जुड़ाव का अनुभव कराता है।

Swami Chidanand Saraswati ने कहा कि भारत की असली शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपराओं और विविध संस्कृतियों में निहित है। गंगा, गुरबाणी और हिमालय का यह संगम पूरी दुनिया को शांति, प्रेम और सहअस्तित्व का संदेश देता है। उन्होंने सिखों के अद्वितीय बलिदानों का स्मरण करते हुए कहा कि इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं, जहाँ एक गुरु ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिये अपना सम्पूर्ण परिवार समर्पित कर दिया हो। गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों का बलिदान भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में सदैव अमर रहेगा।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह, पारंपरिक सम्मान के साथ रवाना हुई संगत

हेमकुण्ड साहिब यात्रा

कार्यक्रम के समापन पर विश्व शांति, मानव कल्याण और सफल यात्रा की कामना की गई। पंच प्यारों का पारंपरिक सम्मान किया गया और श्रद्धालुओं ने जयघोषों के बीच यात्रा दल को विदाई दी। आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण देखने लायक था। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का उत्सव बताया।

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हेमकुण्ड साहिब यात्रा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को हिमालय की कठिन राहों के बीच आस्था, सेवा और समर्पण का अनुभव कराती है। इस वर्ष भी यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है और प्रशासन तथा धार्मिक संस्थाओं की ओर से यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिये व्यापक तैयारियाँ की गई हैं।

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