एएनपीआर कैमरों पर बड़ा फैसला, उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा को मिलेगा हाईटेक कवच

देहरादून में मुख्य सचिव की बड़ी बैठक, एएनपीआर कैमरों और सड़क सुरक्षा को लेकर बनेगा नया एक्शन प्लान

उत्तराखंड में सड़क हादसों को कम करने और ट्रैफिक मॉनिटरिंग को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अब बड़ा कदम उठाया गया है। मंगलवार को सचिवालय में आयोजित राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंध समिति की दूसरी बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने की। इस बैठक में सबसे अहम फैसला पूरे प्रदेश के लिए एएनपीआर यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों की एकीकृत कार्ययोजना तैयार करने को लेकर लिया गया।

सरकार अब सड़क सुरक्षा को केवल चालान या ट्रैफिक कंट्रोल तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी प्रणाली में बदलने की तैयारी कर रही है। बैठक में स्पष्ट किया गया कि परिवहन विभाग, पुलिस विभाग, राज्यकर विभाग और खनन विभाग सभी को एएनपीआर कैमरों की आवश्यकता है, इसलिए अलग-अलग व्यवस्था बनाने के बजाय एक साझा और इंटीग्रेटेड सिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे न केवल वाहनों की निगरानी आसान होगी बल्कि अवैध खनन, टैक्स चोरी और नियम उल्लंघन जैसे मामलों पर भी तेज कार्रवाई संभव हो सकेगी।

क्या है एएनपीआर सिस्टम और क्यों बढ़ रही इसकी जरूरत

एएनपीआर तकनीक आज देश के कई राज्यों में ट्रैफिक और सुरक्षा प्रबंधन का अहम हिस्सा बन चुकी है। यह कैमरा तकनीक सड़क पर चलने वाले वाहनों की नंबर प्लेट को ऑटोमैटिक तरीके से स्कैन करती है और उसका डेटा तुरंत सर्वर पर रिकॉर्ड हो जाता है। इससे ओवरस्पीडिंग, बिना टैक्स वाहन, चोरी की गाड़ियां, फर्जी नंबर प्लेट और अवैध परिवहन गतिविधियों पर निगरानी रखना आसान हो जाता है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और पर्यटन राज्य में यह तकनीक और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चारधाम यात्रा, पर्यटन सीजन और पहाड़ी मार्गों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए सरकार अब डिजिटल ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम को तेजी से लागू करना चाहती है। यही कारण है कि मुख्य सचिव ने परिवहन सचिव को पूरे प्रदेश के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

हर महीने बनेगी चालान रिपोर्ट, सीएम ऑफिस तक पहुंचेगा डेटा

बैठक में मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग और पुलिस विभाग दोनों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने चालानों की संयुक्त मासिक रिपोर्ट तैयार कर मुख्य सचिव कार्यालय को भेजें। इससे राज्य में ट्रैफिक नियमों के पालन और कार्रवाई की वास्तविक स्थिति की मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अब तक कई विभाग अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई कर रहे थे, लेकिन डेटा का केंद्रीकरण नहीं हो पा रहा था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह पता लगाना आसान होगा कि किन जिलों में सबसे ज्यादा नियम उल्लंघन हो रहे हैं, कहां सड़क हादसों की संभावना अधिक है और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की जरूरत है।

सड़क सुरक्षा कोष के लिए बनेगी वार्षिक कार्ययोजना

एएनपीआर कैमरों

बैठक में सड़क सुरक्षा कोष को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा कोष की वार्षिक कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि बजट का उपयोग व्यवस्थित और परिणाम आधारित तरीके से हो सके। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कैमरे लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें सड़क डिजाइन, चेतावनी संकेत, ट्रैफिक प्रबंधन, सुरक्षा उपकरण और जागरूकता अभियान जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।

सरकार अब सड़क सुरक्षा से जुड़े खर्चों को प्राथमिकता के आधार पर वर्गीकृत करने की तैयारी में है। जिन कार्यों के लिए विभागीय बजट उपलब्ध नहीं होगा, उन्हें सड़क सुरक्षा कोष से वित्तीय सहायता दी जाएगी।

रोड फर्नीचर और साइनेज पर भी फोकस

बैठक में सड़क सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि रोड फर्नीचर, रोड मार्किंग और साइनेज जैसे नियमित कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा ही किए जाएंगे। सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों से जुड़े कार्य विभागीय बजट से कराने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में खराब साइनेज और अपर्याप्त रोड फर्नीचर भी सड़क हादसों का बड़ा कारण बनते हैं। ऐसे में सरकार अब सड़क सुरक्षा को केवल कानून व्यवस्था नहीं बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के रूप में भी देख रही है।

प्रस्तावों की जांच के लिए बनेगी उपसमिति

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा कोष से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को समिति के समक्ष रखने से पहले एक उपसमिति द्वारा उसकी स्क्रूटिनी की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं में डुप्लीकेसी न हो और एक ही कार्य के लिए कई विभाग अलग-अलग बजट न मांगें।

सरकार की यह रणनीति प्रशासनिक पारदर्शिता और बजट की प्रभावशीलता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजनाओं की वास्तविक आवश्यकता और उपयोगिता की विस्तृत समीक्षा के बाद ही उन्हें स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया जाए।

सड़क हादसों पर लगाम लगाने की बड़ी तैयारी

उत्तराखंड में हर साल सड़क हादसों के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में ओवरस्पीडिंग, खतरनाक मोड़, खराब मौसम और नियम उल्लंघन के कारण दुर्घटनाएं बढ़ती रही हैं। ऐसे में सरकार अब तकनीक आधारित सड़क सुरक्षा मॉडल लागू कर हादसों को कम करने की दिशा में काम कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एएनपीआर सिस्टम को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो इससे ट्रैफिक अनुशासन में सुधार होगा और कानून तोड़ने वालों पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी। साथ ही इससे राज्य के विभिन्न विभागों के बीच डेटा शेयरिंग और समन्वय भी मजबूत होगा।

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बैठक में मौजूद रहे कई वरिष्ठ अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि प्रदीप पंत, सचिव पंकज कुमार पाण्डेय, बृजेश कुमार संत, वी. षणमुगम, अपर सचिव निवेदिता कुकरेती और रोहित मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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