उत्तराखंड इस समय किसी सामान्य मानसून का सामना नहीं कर रहा, बल्कि यह एक प्राकृतिक प्रलय के बीच खड़ा है। आसमान से बरसती बौछारें अब जीवनदायिनी नहीं रहीं, वे अब त्रासदी का रूप ले चुकी हैं। नदियां उफान पर हैं, पहाड़ों से मलबा बरस रहा है, सड़कें कट चुकी हैं और कई ज़िंदगियां मौत के साये में कांप रही हैं।
उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, जनहानि की पुष्टि

मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने की भीषण घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। खीरगंगा नदी में अचानक आए सैलाब ने होटल, दुकानें और घरों को अपने साथ बहा ले गया। दर्जनों लोग लापता हैं और कईयों के शव अब तक मलबे से निकाले जा चुके हैं। स्थानीय प्रशासन और SDRF की टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण बचाव अभियान भी कठिन हो गया है।

विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा,
“यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, एक मानवीय त्रासदी है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि उत्तरकाशी की जनता को यह पीड़ा सहने की शक्ति मिले।“
नदियों का रौद्र रूप, खतरे की सीमाएं लांघती धारा

राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के बेहद करीब बह रही हैं:
- ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 338.60 मीटर (खतरा स्तर 340.50 मीटर)
- हरिद्वार में 292.75 मीटर (खतरा स्तर 294 मीटर)
- अलकनंदा, सरयू, यमुना, काली जैसी नदियों पर भी रेड अलर्ट जारी है
🚧 मलबा ही मलबा – 117 सड़कों पर मौत की खामोशी
भारी भूस्खलन से अब तक 117 सड़कें बंद हो चुकी हैं:
- 4 राष्ट्रीय राजमार्ग, 5 राज्य मार्ग, 79 ग्रामीण सड़कें
- ऋषिकेश-गंगोत्री, ऋषिकेश-यमुनोत्री हाईवे पर कई जगहों पर बड़ा भूस्खलन
- पिथौरागढ़ में लिपुलेख और तवाघाट हाईवे पूरी तरह बाधित
जिलावार सड़कों की स्थिति:
- पौड़ी: 20
- नैनीताल: 13
- टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून: 8-8
- बागेश्वर: 4
- अल्मोड़ा: 2
⚠️ 10 अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान, अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने चेताया है कि 10 अगस्त तक तेज बारिश जारी रहेगी, विशेषकर पर्वतीय जिलों में।
- देहरादून, पौड़ी, टिहरी, हरिद्वार में सभी स्कूल बंद
- देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, ऊधमसिंहनगर, टिहरी में ऑरेंज अलर्ट
- शेष जिलों में येलो अलर्ट घोषित
🕯️ 3 की मौत, 6 घायल – एक-एक जान पर भारी बारिश
अब तक की सूचना के अनुसार तीन लोगों की मौत हो चुकी है, छह लोग घायल हैं। जानें चली गईं, आशियाने उजड़ गए और आंखों के सामने सबकुछ बहता चला गया।
🏛️ सरकार अलर्ट पर, मुख्यमंत्री लगातार निगरानी में

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा नियंत्रण कक्षों से सीधा संवाद कर राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी पीड़ित को अकेला न छोड़ा जाए।
“प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह से जनता के साथ है। हर प्रभावित परिवार तक मदद पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।” – मुख्यमंत्री धामी
मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन सचिव, और गृह सचिव भी अलग-अलग जिलों में निरीक्षण के लिए रवाना किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से भी आवश्यक सहायता की मांग की है।
🛑 यह केवल बारिश नहीं, यह प्रकृति का गुस्सा है
इस पूरे संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध निर्माण का ख़ामियाज़ा पर्वतीय राज्य को किस तरह झेलना पड़ रहा है। जब नदियां रुकने को तैयार नहीं, जब पहाड़ टूटने को मजबूर हैं – तब इंसान को सिर झुकाकर विनम्रता से कहना पड़ता है:
“हमने प्रकृति से खेल किया… अब सजा भुगत रहे हैं।”
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