नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 4 सितंबर 2025 – अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक दिलचस्प घटना सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के साथ आए पाकिस्तानी राजनयिकों ने हाल ही में यह सवाल उठाया कि भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के लिए आवास व्यवस्था में इतना अंतर क्यों है।
मामला तब और पेचीदा हो गया जब यह जानकारी सामने आई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके दौरे के दौरान जिस स्तर की सुविधाएँ और उच्चस्तरीय आवास मुहैया कराई गईं, वैसी सुविधा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को उपलब्ध नहीं कराई गई। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने इस भेदभाव पर चिंता जताई और चीन से स्पष्ट जवाब माँगा।
सूत्रों के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने इस विषय पर कोई सीधी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। उनका रुख था कि आवास और प्रोटोकॉल से जुड़ी व्यवस्थाएँ अलग-अलग देशों के साथ राजनयिक स्तर पर तय होती हैं और इन्हें साझा करना उनकी नीति के खिलाफ है। हालांकि, पाकिस्तान के भीतर इसे एक असमान व्यवहार के तौर पर देखा जा रहा है।
इस मुद्दे ने इस्लामाबाद में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। आलोचक इसे पाकिस्तान की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक स्थिति की कमजोरी के रूप में देख रहे हैं। वहीं, भारत में इस मामले को एक “राजनयिक उपलब्धि” के रूप में पेश किया जा रहा है, क्योंकि यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल आवास की सुविधा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह देशों के बीच “प्राथमिकता और प्रभाव” को दर्शाने वाला संकेत है। अंतरराष्ट्रीय दौरों में ऐसे संकेत अक्सर ज्यादा मायने रखते हैं, क्योंकि इनसे यह साफ होता है कि कौन-सा देश वैश्विक मंच पर कितना प्रभावी है।
यह घटना भविष्य में भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर किस हद तक असर डालेगी, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान की ओर से उठाया गया यह सवाल उसकी आंतरिक और बाहरी राजनीति में बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।