बागेश्वर जिले में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हिला दिया है। जिला चिकित्सालय में एक मासूम बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कई चिकित्सकों और कर्मचारियों को दोषी ठहराकर कठोर दंड दिया है।
यह मामला केवल एक बच्चे की मौत का नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट और कारण बताओ नोटिस के जवाब के बाद दोषियों की पहचान हुई और अब उन पर कड़ी कार्रवाई की गई है।
लापरवाही की पूरी कहानी
बागेश्वर जिला चिकित्सालय में भर्ती एक बच्चे की हालत गंभीर थी, लेकिन चिकित्सकों और स्टाफ की कथित उदासीनता ने उसकी जिंदगी छीन ली।
एम्बुलेंस व्यवस्था से लेकर इलाज तक हर स्तर पर लापरवाही उजागर हुई। यही नहीं, बच्चे की जान बचाने के लिए जिम्मेदार चिकित्सकों और कर्मचारियों ने संवेदनशीलता भी नहीं दिखाई।
दोषियों पर गिरी गाज – कौन हुआ दंडित?
1. डॉ. तपन शर्मा – प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
आरोप: प्रशासनिक अक्षमता, संवेदनशीलता की कमी और एम्बुलेंस व्यवस्था में लापरवाही।
कार्रवाई: तत्काल प्रभाव से पद और दायित्वों से मुक्त, अब निदेशक कुमांऊ मंडल से संबद्ध।
2. ईश्वर सिंह टोलिया एवं लक्ष्मण कुमार – 108 एम्बुलेंस चालक
आरोप: कर्तव्यों के प्रति उदासीनता और असंवेदनशीलता।
कार्रवाई: एक माह तक कार्य से विरक्त रहने का आदेश, अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश।
3. नर्सिंग अधिकारी महेश कुमार, श्रीमती हिमानी और कक्ष सेवक सूरज सिंह कन्नाल
आरोप: अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और असंवेदनशीलता।
कार्रवाई: कठोर चेतावनी जारी, भविष्य में गलती न दोहराने का आदेश।
4. डॉ. भूरेन्द्र घटियाल – चिकित्साधिकारी
आरोप: उदासीनता और संवेदनशीलता की कमी।
कार्रवाई: कड़ी चेतावनी जारी।
5. डॉ. अंकित कुमार – बाल रोग विशेषज्ञ
आरोप: संघर्षरत बालक के प्रति सहानुभूति न दिखाना और इलाज में उदासीनता।
कार्रवाई: प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज।
स्वास्थ्य सचिव ने दी चेतावनी
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बयान जारी करते हुए कहा,
“यह घटना बेहद दुखद है। मुख्यमंत्री जी के स्पष्ट निर्देश पर तुरंत कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर कर्मचारी और अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी पूरी संवेदनशीलता के साथ निभानी होगी, अन्यथा कठोर दंड के लिए तैयार रहें।”
जनता का आक्रोश और बड़ा सवाल
इस घटना ने जनमानस में आक्रोश भर दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब जिला अस्पताल में यह हाल है, तो ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति कितनी भयावह होगी?
यह मामला केवल एक विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता को भी सामने लाता है।