राज्यभर में होंगी प्रवासी पंचायतें
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि रिवर्स पलायन को संस्थागत रूप देने के लिए राज्य के सभी जिलों में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाएगा। इन पंचायतों में देश-विदेश में कार्यरत उत्तराखंड के प्रवासियों को आमंत्रित कर सरकार की योजनाओं, निवेश अवसरों और स्वरोज़गार से जुड़ी पहलों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही प्रवासियों से सुझाव लेकर नीति निर्माण को ज़मीनी स्तर से मज़बूत किया जाएगा।
ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करने पर फोकस
बैठक में बताया गया कि पिछले चार–पाँच वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार और आय के साधन बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। स्वरोज़गार योजनाओं के तहत ऋण पर सब्सिडी दी जा रही है, जिससे कृषि, पर्यटन, पशुपालन और लघु उद्योगों को गति मिल रही है। इसका सीधा असर गाँवों की आर्थिक सेहत पर दिखने लगा है।
वेडिंग डेस्टिनेशन से बढ़ेगा पहाड़ी अर्थतंत्र
सरकार ने त्रियुगीनारायण मॉडल पर राज्य के 25 नए स्थलों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इन स्थलों पर सड़क, बिजली, पानी, संचार और ठहराव जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पर्यटन, स्थानीय सेवाओं और रोजगार के नए अवसर बनेंगे, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में।
अन्य राज्यों के नवाचारों से सीख
मुख्यमंत्री ने आयोग के सदस्यों को निर्देश दिए कि वे अन्य राज्यों में जाकर रिवर्स पलायन से जुड़े सफल प्रयोगों और नवाचारों का अध्ययन करें। उद्देश्य साफ है—जो काम कहीं और बेहतर हो रहा है, उसे उत्तराखंड की ज़रूरतों के मुताबिक अपनाया जाए।

रिवर्स पलायन के उत्साहजनक आंकड़े
ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के अनुसार अब तक 6282 लोग अपने गाँवों में लौट चुके हैं। इनमें देश के भीतर और विदेश से लौटे लोग शामिल हैं। अधिकांश लोग पर्यटन और लघु उद्योग से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह संकेत है कि नीति और ज़मीन के बीच तालमेल बन रहा है।
बैठक में प्रस्तुत हुए रचनात्मक सुझाव
आयोग की बैठक में रिवर्स पलायन को और तेज़ करने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव सामने आए। इनमें स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग, कौशल विकास, बाज़ार से सीधा जुड़ाव और प्रवासी नेटवर्क का उपयोग शामिल है। सरकार इन सुझावों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर विचार कर रही है।