जयपुर में मेले की रौनक, क्रिसमस पर उमड़ा जनसैलाब
जयपुर में आयोजित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 इन दिनों पूरे रंग और जीवंतता के साथ दर्शकों को आकर्षित कर रहा है। क्रिसमस की छुट्टी के चलते मेला परिसर दिनभर परिवारों, युवाओं और बच्चों से गुलजार रहा। बच्चों के लिए आयोजित लाइव क्लासेज़ में मिट्टी के बर्तन, क्रोशिया, मंडला आर्ट और पेंटिंग जैसी गतिविधियों ने खास आकर्षण पैदा किया।
हस्तकला और फूड कोर्ट बना पारिवारिक आकर्षण
मेले में आए लोगों ने देशभर से आए हस्तनिर्मित उत्पादों की जमकर खरीदारी की। फूड कोर्ट में पारंपरिक और क्षेत्रीय व्यंजनों का स्वाद लेते हुए लोग देर शाम तक मेले का आनंद उठाते दिखे। यह साफ संकेत था कि ग्रामीण उत्पाद अब शहरी बाजार में भी मजबूत पकड़ बना रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण पर प्रेरक संवाद
मेले के तहत आयोजित विशेष टॉक शो में राजीविका की ब्रांड एम्बेसडर डॉ. रूमा देवी ने “एम्पॉवरिंग वीमेन, ट्रांसफॉर्मिंग लाइव्स – फ्रॉम स्किल टू सेल्फ रिलायंस” विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने एसएचजी से जुड़ी महिलाओं को अपने कौशल को पहचानने, बाजार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। यह सत्र महिलाओं के आत्मविश्वास और उद्यमशीलता को नई दिशा देने वाला रहा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी शाम
संध्या कार्यक्रमों में महाराष्ट्र की पारंपरिक लावणी और गोंडल नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सांस्कृतिक रंगों से सजी यह शाम मेले के माहौल को और खास बनाती नजर आई।
फैशन शो बना मेले का केंद्रबिंदु
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण भव्य फैशन शो रहा। शो स्टॉपर के रूप में अभिनेत्री डेज़ी शाह ने हेरिटेज दरबार कश्मीरी सिल्क साड़ी में रैम्प पर उतरकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उनके साथ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ रैम्प वॉक कर यह साबित किया कि ग्रामीण महिलाएं किसी भी मंच पर पीछे नहीं हैं।
एसएचजी महिलाओं की सशक्त मौजूदगी
उत्तराखंड से जयश्री वर्मा, चूरू से सुमित्रा, हिमाचल प्रदेश से रुचिका, पश्चिम बंगाल से माधोबी और आंध्र प्रदेश से रहीमुनीसा ने फैशन शो में भाग लेकर दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति ने ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर पेश की।
पारंपरिक परिधानों और एक्सेसरीज़ का भव्य प्रदर्शन
फैशन शो में गुजराती लहंगा, आंध्र प्रदेश की साड़ियां, बाड़मेर की शॉल और जैकेट, सिल्क साड़ियां, कढ़ाईदार जैकेट, कश्मीरी सूट और हाथ से पेंट किए गए परिधान प्रदर्शित किए गए। साथ ही बाड़मेर कढ़ाई वाले स्लिंग बैग, जूट टोट बैग, पश्चिम बंगाल के बांस के पंखे और हैंडमेड फूलों ने भी खूब सराहना बटोरी।
ग्रामीण उद्यमों को बाजार से जोड़ने की नई पहल
आत्मनिर्भर भारत की झलक
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 ग्रामीण शिल्प, संस्कृति और परंपरा को बाजार से जोड़ने का सशक्त मंच बनकर उभरा है। यह आयोजन महिला उद्यमिता, स्थानीय उत्पादों और आत्मनिर्भर भारत के विचार को जमीनी स्तर पर मजबूत करता नजर आ रहा है।
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