गोपनीय ACR का सोशल मीडिया पर प्रसार, पुलिस मुख्यालय सख्त
उत्तराखंड पुलिस में एक संवेदनशील प्रशासनिक प्रकरण सामने आया है। निलंबित उप निरीक्षक कुन्दन सिंह रौतेला की वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) के सोशल मीडिया पर अनधिकृत रूप से प्रसारित होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने इसकी जांच STF को सौंप दी है।
यह ACR leak STF investigation सीधे तौर पर पुलिस विभाग की आंतरिक गोपनीयता, डिजिटल सुरक्षा और प्रशासनिक अनुशासन से जुड़ा हुआ मामला माना जा रहा है।
👮 DGP दीपम सेठ का सख्त रुख, गहन जांच के निर्देश
पुलिस मुख्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड, ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर मानते हुए SSP STF को विस्तृत, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम जांच कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ACR leak STF investigation में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच किसी भी स्तर पर सतही न रहे और सभी तकनीकी साक्ष्यों को विधिवत खंगाला जाए।
🔍 ACR जैसे गोपनीय दस्तावेज का लीक होना क्यों गंभीर
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की ACR एक अत्यंत गोपनीय डिजिटल दस्तावेज होती है। इसका उद्देश्य केवल आंतरिक मूल्यांकन और प्रशासनिक निर्णयों तक सीमित रहता है।
ऐसे दस्तावेज का सोशल मीडिया जैसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर सामने आना न केवल व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की डिजिटल सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। इसी कारण ACR leak STF investigation को सामान्य विभागीय जांच की बजाय विशेष एजेंसी को सौंपा गया है।
🖥️ अनधिकृत डेटा एक्सेस की आशंका, साइबर एंगल से जांच
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ACR केवल सुरक्षित आईटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही अधिकृत अधिकारियों द्वारा एक्सेस की जा सकती है। किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा इसे सीधे एक्सेस करना तकनीकी रूप से संभव नहीं माना जाता।
ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि या तो अनधिकृत डेटा एक्सेस हुआ है या फिर किसी स्तर पर डिजिटल सुरक्षा में चूक हुई है। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए ACR leak STF investigation को साइबर फॉरेंसिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया जाएगा।
📂 प्रतिकूल ACR के बावजूद थानाध्यक्ष तैनाती पर पहले से जांच
इस मामले से जुड़ा एक अहम प्रशासनिक पहलू भी सामने आया है। प्रेस नोट के अनुसार, संबंधित उप निरीक्षक के विरुद्ध प्रतिकूल ACR टिप्पणी दर्ज होने के बावजूद उन्हें थानाध्यक्ष पद पर तैनात किए जाने को लेकर पहले से ही जांच प्रचलित है।
ऐसे में ACR का सार्वजनिक होना इस पूरे प्रकरण को और अधिक संवेदनशील बना देता है। अधिकारियों के अनुसार, ACR leak STF investigation में इस बिंदु को भी पृष्ठभूमि के रूप में देखा जाएगा।
👮 STF कुमाऊं यूनिट ने संभाली जांच की कमान
SSP STF नवनीत भुल्लर ने बताया कि पुलिस मुख्यालय के आदेशों के क्रम में STF कुमाऊं यूनिट द्वारा जांच प्रारंभ कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि जांच में सभी तथ्यों, दस्तावेजों और तकनीकी पहलुओं की गहराई से समीक्षा की जाएगी। इसमें साइबर फॉरेंसिक, लॉग एनालिसिस, डिजिटल ट्रेल और संभावित डेटा लीक चैनलों की जांच शामिल होगी।
उनके अनुसार, ACR leak STF investigation का उद्देश्य केवल दस्तावेज के लीक होने का स्रोत ढूंढना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम की कमजोरियों की पहचान करना भी है।
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⚖️ प्रशासनिक पारदर्शिता और अनुशासन का संदेश
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई उत्तराखंड पुलिस के भीतर गोपनीयता, अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक स्पष्ट संदेश देती है।
यदि गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने जैसे मामलों में सख्त और तकनीकी जांच नहीं की गई, तो इससे न केवल संस्थागत विश्वास कमजोर होता है, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है।
इसी कारण ACR leak STF investigation को आने वाले समय में पुलिस विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण test case के रूप में देखा जा रहा है।
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