काठगोदाम।
सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण की जांच अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) के अध्यक्ष एवं आईजी एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे स्वयं काठगोदाम पहुंचे और अपनी टीम के साथ घटनास्थल (क्राइम सीन) का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम द्वारा मौके से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए।
SIT प्रमुख की इस मौजूदगी को जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह संकेत भी गया है कि प्रकरण की विवेचना अब केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर तथ्यों की गहन पड़ताल की जाएगी।
क्राइम सीन पर FSL की सक्रिय भूमिका
SIT के साथ पहुंची एफएसएल टीम ने घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया। साक्ष्यों के संरक्षण और संभावित तकनीकी संकेतों को सुरक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। SIT सूत्रों के अनुसार, यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी तरह से साक्ष्यों की श्रृंखला (Chain of Custody) प्रभावित न हो।
साथ ही, प्रकरण से जुड़े स्वतंत्र गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि जांच किसी एक पक्षीय दृष्टिकोण पर आधारित न रहे।

दस्तावेज और रिकॉर्ड संरक्षित करने के निर्देश
SIT चीफ नीलेश आनन्द भरणे ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेजों और अभिलेखों को पूरी तरह सुरक्षित किया जा रहा है।
इसके तहत—
- ऊधमसिंहनगर पुलिस कार्यालय
- थाना आईटीआई
- चौकी पैगा
- तथा अन्य संबंधित शाखाओं और कार्यालयों
में उपलब्ध समस्त रिकॉर्ड को संरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी स्तर पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना न रहे और जांच की विश्वसनीयता बनी रहे।
स्थानीय पुलिस के संपर्क पर रोक
प्रकरण की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए SIT द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। SIT टीम के अलावा स्थानीय पुलिस को पीड़ित परिवार या गवाहों से अनावश्यक संपर्क न करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रशासनिक जानकारों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि जांच पर किसी भी प्रकार का दबाव, प्रभाव या भ्रम उत्पन्न न हो और पीड़ित पक्ष को मानसिक रूप से सुरक्षित माहौल मिल सके।
पीड़ित परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता
SIT ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर भी ठोस कदम उठाए हैं।
निर्देश दिए गए हैं कि—
- पीड़ित परिजनों के आवास पर
- अन्य जनपदों से पुलिस गार्द तैनात की जाएगी
इस निर्णय को परिवार की सुरक्षा के साथ-साथ गवाहों की निर्भीकता सुनिश्चित करने के रूप में देखा जा रहा है।
तकनीकी जांच के लिए SIT का विस्तार

मामले की तकनीकी विवेचना को मजबूत करने के लिए SIT में छह पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है। इनमें—
- उप निरीक्षक हेमन्त कठैत – थाना लोहाघाट
- उप निरीक्षक सोनू सिंह – एएनटीएफ
- उप निरीक्षक राधिका भण्डारी – थाना चम्पावत
- हेड कांस्टेबल विनोद यादव – थाना बनबसा
- हेड कांस्टेबल कमल कुमार – थाना टनकपुर
- कांस्टेबल गिरीश भट्ट – सर्विलांस सेल, टनकपुर
शामिल हैं।
इनकी तैनाती से स्पष्ट है कि कॉल डिटेल, डिजिटल ट्रेल और अन्य तकनीकी पहलुओं पर भी गहन जांच की जाएगी।
पीड़ित परिवार से SIT की मुलाकात
देर सायं SIT टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान SIT चीफ नीलेश आनन्द भरणे ने परिवार को आश्वस्त किया कि जांच पूरी तरह तथ्यों, साक्ष्यों और विधिक प्रावधानों के आधार पर निष्पक्ष रूप से की जा रही है।
उन्होंने बताया कि घटनास्थल निरीक्षण के बाद थाना आईटीआई में दर्ज FIR को अब थाना काठगोदाम स्थानांतरित किया जा रहा है, ताकि विवेचना उसी क्षेत्राधिकार में की जा सके जहां घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
सख्त और विधिसम्मत कार्रवाई का भरोसा
SIT प्रमुख ने स्पष्ट किया कि विवेचना के दौरान यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या अपराध सामने आता है, तो विधिसम्मत सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
जांच पर टिकी निगाहें
सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण को लेकर अब प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर निगाहें SIT की जांच पर टिकी हैं। IG STF के स्वयं मैदान में उतरने से यह संकेत साफ है कि सरकार और पुलिस प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।
आने वाले दिनों में तकनीकी विश्लेषण, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट इस संवेदनशील प्रकरण की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।