AI से बदलेगी इलाज की तस्वीर: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का नया मॉडल

लोक भवन में AI और स्वास्थ्य पर मंथन

देहरादून स्थित लोक भवन में “स्वास्थ्य क्षेत्र में AI का प्रभावी उपयोग” विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम का आयोजन हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। इसमें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत की मौजूदगी ने कार्यक्रम को नीति और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर मजबूती दी।

यह आयोजन साफ संकेत देता है कि उत्तराखंड अब पारंपरिक स्वास्थ्य मॉडल से आगे बढ़कर तकनीक-संचालित स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर कदम बढ़ा रहा है।


AI अब इलाज को बनाएगा व्यक्तिगत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि AI केवल तकनीक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में सोच का बदलाव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सा अब “वन साइज फिट्स ऑल” मॉडल तक सीमित नहीं रह सकती। AI के माध्यम से इलाज को “वन पेशेंट-वन सॉल्यूशन” की दिशा में ले जाया जा रहा है, जहां हर मरीज के लिए अलग समाधान संभव होगा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि AI को डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि उनका सहयोगी मानकर अपनाना चाहिए, ताकि निर्णय अधिक सटीक और समय पर हो सकें।


पहाड़ों और दूरस्थ इलाकों के लिए बड़ी उम्मीद

उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि AI पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकता है। जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच मुश्किल है, वहां AI आधारित तकनीक निदान, प्रारंभिक जांच और फॉलो-अप में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

यह दृष्टिकोण स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने की रणनीति को मजबूती देता है और डिजिटल हेल्थ के रोडमैप को स्पष्ट करता है।


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विशेषज्ञों ने रखे तकनीकी अनुभव

कार्यक्रम में सीआरएमआईटी बेंगलुरु के सीओओ सी. वी. वेंकट सुब्रह्मण्यम ने AI आधारित एप्लिकेशन “धनवंतरी” की कार्यप्रणाली और उसके व्यावहारिक उपयोग पर जानकारी दी। वहीं एम्स ऋषिकेश के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष अंकुर मित्तल ने AI की मदद से कैंसर निदान और उपचार की आधुनिक तकनीकों पर प्रकाश डाला।

इन प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि AI अब प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे मरीजों के इलाज में उपयोगी बन रहा है।


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सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा AI

स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि सेमिनार में आए विशेषज्ञ सुझावों को विभागीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य ने पिछले 25 वर्षों में चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और अब AI के माध्यम से इस प्रगति को नई गति दी जाएगी।

कार्यक्रम में कुलपति अरुण कुमार त्रिपाठी, अपर सचिव रीना जोशी, डीन गीता जैन, कुलसचिव आशीष उनियाल सहित कई अधिकारी, विशेषज्ञ और मेडिकल छात्रों की भागीदारी रही।

 

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