टैरिफ के पीछे का झूठा नैरेटिव
ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ थोपने की धमकी दी। वजह बताई – रूस से भारत द्वारा तेल खरीदना।
पर सवाल उठता है – क्या यही असली वजह है?
अगर रूस से तेल खरीदना ही मुद्दा है, तो फिर –
- तुर्की, NATO सदस्य, $44 अरब का आयात कर रहा है
- यूरोपीय संघ, अमेरिका का करीबी, $33 अरब का आयात कर रहा है
- चीन, सबसे बड़ा आयातक
- खुद अमेरिका, $3.3 अरब का फर्टिलाइजर और यूरेनियम रूस से मंगाता है
तो फिर अकेले भारत को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
असली कारण – ट्रंप की फेल विदेश नीति और चुनावी वादे
ट्रंप ने वादा किया था – “मैं सत्ता में आते ही 24 घंटे में यूक्रेन युद्ध खत्म करवा दूंगा!”
इसके लिए उन्होंने चीन और भारत दोनों के जरिए पुतिन तक पहुंचने की कोशिश की।
भारत ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
नतीजा?
ट्रंप ने भारत पर दबाव बनाना शुरू किया –
“रूस से तेल खरीदना बंद करो वरना टैरिफ लगेगा!”
जब भारत टस से मस नहीं हुआ, तो धमकी हकीकत में बदलने लगी।
लॉबिस्ट का लालच और अमेरिका का बाजार
ट्रंप का लॉबी समूह चाहता है कि भारत अमेरिकी डेयरी, कृषि और क्रिप्टो मार्केट के लिए खुले।
पर मोदी सरकार साफ खड़ी हो गई:
- न अमेरिकी दूध आएगा
- न GMO फसलें
- न क्रिप्टो सौदे
क्रिप्टो डील के लिए ट्रंप ने पाकिस्तान को चुना, वहाँ भी कुछ नहीं हुआ।
एक झूठ फैला कि ट्रंप ने भारत-पाक के बीच सीजफायर कराया, पर संसद में मोदी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
अमेरिका की अर्थव्यवस्था और ट्रंप की गिरती साख
ट्रंप का सबसे बड़ा दावा था – “मैं महंगाई कम करूंगा, बाजार सुधारूंगा।”
हकीकत?
- 64% अमेरिकियों को लग रहा है ग्रोसरी महंगी हुई है
- ट्रंप की इकोनॉमी अप्रूवल रेटिंग 39% तक गिर गई है
- टैरिफ नीति पर 71% तक नकारात्मक राय
टैरिफ से खुद अमेरिकी उपभोक्ता जल रहे हैं, पर ट्रंप मानने को तैयार नहीं।
मोदिनोमिक्स का असर और डीडॉलराइजेशन का डर
भारत और रूस मिलकर रुपया-रूबल ट्रांजैक्शन सिस्टम बना रहे हैं, जिससे SWIFT और डॉलर पर निर्भरता खत्म हो।
यह ट्रंप के लिए सबसे बड़ा खतरा है —
De-dollarization यानी डॉलर का वैश्विक दबदबा कम होना।
अगर भारत यह कर लेता है, तो बाकी देश भी यही रास्ता अपना सकते हैं।
भारत का बढ़ता निर्यात, अमेरिका की बेचैनी
भारत रूस से हर साल $55 अरब का आयात करता है, और सिर्फ $6 अरब का निर्यात।
अब भारत इस व्यापार असंतुलन को सुधारने के लिए तैयार है –
- FTA साइन कर चुका है UAE और UK से
- ब्राजील और कैरेबियन देश भारत के हथियारों में रुचि दिखा रहे हैं
- F-35 अब प्राथमिकता नहीं, Su-57 पसंद बनता जा रहा है
भारतीय रक्षा उत्पाद जैसे तेजस, ब्रह्मोस, और आकाश मिसाइल सिस्टम अब ग्लोबल मार्केट में चमक रहे हैं।
इससे अमेरिकी रक्षा लॉबी में घबराहट है।
ट्रंप का नोबेल सपना और निवेश की नाकामी
ट्रंप ने यूक्रेन में $1 ट्रिलियन के “रिकंस्ट्रक्शन मार्केट” की उम्मीद में नोबेल पुरस्कार का सपना भी देख लिया था।
भारत को युद्ध रुकवाने के लिए मनाना चाहते थे ताकि बिज़नेस शुरू हो सके।
पर भारत ने एक बात साफ कर दी – हम किसी दबाव में मध्यस्थता नहीं करेंगे।
इसी के साथ ट्रंप की “24 घंटे में युद्ध खत्म कर दूंगा” वाली बात भी खोखली साबित हुई।
टैरिफ की धमकी, असल में ट्रंप की हताशा का संकेत
जब
- ट्रंप की विदेशी नीति फेल हो जाए,
- चुनावी वादे बूमरैंग बन जाएं,
- घरेलू अर्थव्यवस्था जवाब देने लगे,
- और भारत जैसी अर्थव्यवस्था आंख में आंख डालकर जवाब दे…
…तो टैरिफ जैसी धमकियों का तमाशा ही एकमात्र रास्ता बचता है।
पर ये 2025 का भारत है, जहां अब ट्रंप के टैरिफ नहीं, मोदिनोमिक्स की चाल चलती है।