उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 ने इस बार केवल सांस्कृतिक आयोजन का स्वरूप नहीं लिया, बल्कि यह देशभर के जनजातीय समाज के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने जनजातीय संस्कृति, परंपरा और विकास के समन्वय को एक नई दिशा दी। परेड ग्राउंड में आयोजित इस महोत्सव में देश के 12 राज्यों से आए जनजातीय प्रतिनिधियों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बन गया।
जनजातीय महोत्सव 2026 कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक प्रस्तुतियों और लोक कलाओं से हुई, जिसने दर्शकों को जनजातीय जीवन की सादगी, प्रकृति से जुड़ाव और सांस्कृतिक गहराई से रूबरू कराया। यह महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मंच बना जहां जनजातीय समाज की पहचान, उनकी परंपराएं और उनकी चुनौतियां सामने आईं। मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए ठोस योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
जनजातीय महोत्सव 2026 संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज भारतीय संस्कृति की जड़ों का प्रतिनिधित्व करता है। यह समाज न केवल परंपराओं का संरक्षक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक संतुलन और राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाला यह समाज देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में इन समुदायों के विकास को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के विकास के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने ‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय’, ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’, ‘वन धन योजना’ और ‘प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन’ जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन की असली पहचान है।
जनजातीय महोत्सव 2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से 14,272.185 लाख रुपये की पेंशन ‘वन क्लिक’ के जरिए लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की। यह कदम सरकार की डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मार्च माह में ही 9 लाख से अधिक लाभार्थियों को 142 करोड़ रुपये से अधिक की पेंशन दी गई है, जो सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने थारू लोक गायिका स्वर्गीय रिंकू देवी राणा और दर्शन लाल को ‘आदि गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया गया जिन्होंने जनजातीय संस्कृति और समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस सम्मान के माध्यम से सरकार ने यह संदेश दिया कि जनजातीय समाज के योगदान को पहचानना और सम्मानित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 128 जनजातीय गांवों को चिन्हित कर उनके समग्र विकास की योजना बनाई गई है। इसके तहत बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिवर्ष जनजातीय महोत्सव और जनजातीय खेल महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिससे जनजातीय युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में एकलव्य विद्यालय संचालित हैं, जबकि चकराता और बाजपुर में नए विद्यालयों का निर्माण कार्य जारी है। इसके अलावा जनजातीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, आश्रम पद्धति विद्यालय और तकनीकी शिक्षा के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग और आईटीआई संस्थानों के माध्यम से रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि देहरादून में ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ की स्थापना की जा रही है, जहां जनजातीय युवाओं को यूपीएससी, पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इसके लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण भी किया जाएगा। यह पहल जनजातीय युवाओं को मुख्यधारा में लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे जनजातीय समाज को नई पहचान मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी को अपने इतिहास और विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर द्रौपदी मुर्मू का आसीन होना जनजातीय समाज की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि अब जनजातीय समाज केवल हाशिए पर नहीं है, बल्कि देश के नेतृत्व में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया है और समान नागरिक संहिता लागू करते हुए अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है, ताकि उनकी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण भी है।
जनजातीय महोत्सव 2026 के अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, अपर सचिव संजय सिंह टोलिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में जनजातीय प्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कुल मिलाकर, राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा मंच साबित हुआ जिसने जनजातीय समाज के विकास, सम्मान और पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार जिस प्रकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है, वह आने वाले समय में राज्य को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ऐसी ही भरोसेमंद और विस्तृत खबरों के लिए जुड़े रहें और हर अपडेट सबसे पहले पाएं।