देहरादून। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों की रचनात्मकता और उत्साह को मंच देने के उद्देश्य से ‘खास हमारे आस-पास’ की ओर से ऑनलाइन कृष्ण जन्माष्टमी फोटो प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में बच्चों ने कान्हा और राधा के अलग-अलग रूपों में अपनी तस्वीरें साझा कीं। अभिभावकों ने भी बच्चों को पारंपरिक व आकर्षक रूप देने में विशेष मेहनत की।
ऑनलाइन आयोजित इस प्रतियोगिता में नन्हे बच्चों की कृष्ण और राधा के रूप में तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने जन्माष्टमी के धार्मिक और सांस्कृतिक रंग को बच्चों की मासूमियत और रचनात्मकता के साथ जोड़ा। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों की तस्वीरों को लेकर अभिभावकों में भी खास उत्साह दिखाई दिया।
ऑनलाइन प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाया उत्साह

जन्माष्टमी को लेकर बच्चों में हमेशा विशेष उत्साह रहता है। कोई बाल कृष्ण के रूप में नजर आता है तो कोई राधा की वेशभूषा में दिखाई देता है। इसी उत्साह को एक रचनात्मक मंच देने के लिए ‘खास हमारे आस-पास’ की ओर से ऑनलाइन फोटो प्रतियोगिता आयोजित की गई।
प्रतियोगिता के दौरान बच्चों की तस्वीरें साझा की गईं। इनमें कहीं नन्हे कान्हा का पारंपरिक रूप देखने को मिला तो कहीं राधा के रूप में बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से आकर्षित किया।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि बच्चों को केवल तैयार वेशभूषा में प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि अभिभावकों ने तस्वीरों के लिए अलग-अलग अवधारणाओं और प्रस्तुतियों पर भी काम किया। इससे प्रतियोगिता में शामिल तस्वीरों में विविधता देखने को मिली।
अव्युक्त और अविर पंवार ने हासिल किया पहला स्थान

ऑनलाइन कृष्ण जन्माष्टमी फोटो प्रतियोगिता में अव्युक्त एवं अविर पंवार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी प्रस्तुति को प्रतियोगिता में विशेष रूप से पसंद किया गया।
वहीं साहिब सिंह ने द्वितीय स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में बच्चों की भागीदारी और प्रस्तुतियों को देखते हुए पुरस्कारों के लिए अन्य प्रतिभागियों को भी चुना गया।
तृतीय पुरस्कार के लिए रिचा शर्मा, श्रेया वर्मा तथा अंशुमान एवं उनके भाई को विजेता चुना गया।
इस तरह प्रतियोगिता में अलग-अलग आयु और प्रस्तुति के बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
कान्हा और राधा के अलग-अलग रूपों में नजर आए बच्चे

जन्माष्टमी फोटो प्रतियोगिता में बच्चों की तस्वीरों का सबसे आकर्षक पहलू उनका अलग-अलग रूपों में सामने आना रहा। किसी बच्चे ने कान्हा की पारंपरिक वेशभूषा अपनाई तो किसी ने राधा के रूप को प्रस्तुत किया।
बच्चों को तैयार करने में अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। वेशभूषा, सजावट, फोटो की थीम और प्रस्तुति के लिए माताओं ने विशेष मेहनत की।
आयोजकों की ओर से भी उन सभी अभिभावकों का आभार व्यक्त किया गया, जिन्होंने बच्चों को कान्हा के अलग-अलग रूपों और अवधारणाओं में प्रस्तुत करने के लिए समय और मेहनत दी।
स्वर्गापुरी मंदिर ट्रस्ट के कृष्ण जन्मोत्सव से भी जुड़ा आयोजन
ऑनलाइन फोटो प्रतियोगिता को स्वर्गापुरी मंदिर ट्रस्ट के कृष्ण जन्मोत्सव से भी विशेष जुड़ाव मिला। यहां 10–15 से अधिक बच्चे कान्हा और राधा के रूप में पहुंचे।
बच्चों की यह उपस्थिति कृष्ण जन्मोत्सव की रौनक बढ़ाने वाली रही। छोटे-छोटे बच्चे जब कृष्ण और राधा की वेशभूषा में उत्सव का हिस्सा बने तो धार्मिक आयोजन में बच्चों की भागीदारी भी खास तौर पर दिखाई दी।
ऑनलाइन फोटो प्रतियोगिता और मंदिर के कृष्ण जन्मोत्सव से जुड़े इस प्रयास ने बच्चों को जन्माष्टमी के पर्व से रचनात्मक तरीके से जोड़ने का अवसर दिया।
बच्चों की प्रस्तुति में दिखी अभिभावकों की मेहनत
किसी भी बाल प्रतियोगिता में बच्चों की प्रस्तुति के पीछे अभिभावकों की मेहनत महत्वपूर्ण होती है। इस आयोजन में भी बच्चों को तैयार करने और उन्हें अलग-अलग रूप देने में माताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजकों ने विशेष रूप से उन माताओं का धन्यवाद किया, जिन्होंने बच्चों को कान्हा के विभिन्न रूपों और अवधारणाओं में प्रस्तुत करने के लिए मेहनत की।
इस सहयोग में ममता भट्ट और सुमन शर्मा सहित सभी सहयोगी माताओं का योगदान उल्लेखनीय रहा। बच्चों की तस्वीरों को प्रतियोगिता तक पहुंचाने में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया।
डॉ. बीना शर्मा ने इंद्राणी पांधी का जताया आभार
आयोजन के लिए ‘खास हमारे आस-पास’ की डॉ. बीना शर्मा ने इंद्राणी पांधी का विशेष आभार व्यक्त किया। उनके सहयोग से नन्हे कान्हा और राधा को फीचर करने का अवसर मिला।
इस सहयोग के माध्यम से बच्चों की जन्माष्टमी से जुड़ी प्रस्तुतियों को सामने लाने और उन्हें एक साझा मंच देने का अवसर मिला। आयोजन से जुड़े लोगों ने इसे बच्चों की प्रतिभा और अभिभावकों की रचनात्मक मेहनत को सामने लाने वाला प्रयास बताया।
ऑनलाइन सहभागिता प्रमाण-पत्र भी दिए जाएंगे
प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन सहभागिता प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे। इससे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले बच्चों को उनके प्रयास और सहभागिता के लिए औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।
वहीं प्रतियोगिता में चुने गए विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के लिए चुने गए बच्चों को आयोजन से जुड़े स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
इस व्यवस्था से प्रतियोगिता में शामिल बच्चों के लिए सहभागिता और जीत, दोनों को महत्व दिया गया है।
जन्माष्टमी से बच्चों को जोड़ने का रचनात्मक प्रयास
कृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से बच्चों को परिचित कराने का अवसर भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चे त्योहार की परंपराओं, वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रतीकों से जुड़ते हैं।
ऑनलाइन फोटो प्रतियोगिता ने इसी जुड़ाव को एक अलग माध्यम दिया। इसमें बच्चों ने घर से ही अपनी प्रस्तुति तैयार कर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। अभिभावकों को भी बच्चों के साथ मिलकर रचनात्मक गतिविधि करने का अवसर मिला।
स्वर्गापुरी मंदिर ट्रस्ट के कृष्ण जन्मोत्सव से जुड़े बच्चों की भागीदारी ने इस प्रयास को और व्यापक रूप दिया। मंदिर परिसर में कान्हा और राधा के रूप में पहुंचे बच्चों ने उत्सव के माहौल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रतियोगिता ने बच्चों और अभिभावकों को दिया साझा मंच
इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि इसमें बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की भागीदारी भी दिखाई दी। बच्चों की तस्वीरें केवल प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं रहीं, बल्कि परिवारों के लिए जन्माष्टमी को रचनात्मक तरीके से मनाने का माध्यम भी बनीं।
अभिभावकों ने बच्चों के लिए पोशाक तैयार करने, उन्हें कृष्ण या राधा के रूप में सजाने और तस्वीरों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने में मेहनत की। अलग-अलग प्रस्तुतियों में बच्चों की मासूमियत के साथ परिवारों की रचनात्मक सोच भी नजर आई।
यही वजह रही कि ऑनलाइन प्रतियोगिता में शामिल तस्वीरों ने जन्माष्टमी के पारंपरिक उत्सव को डिजिटल मंच से जोड़ दिया।
विजेताओं के साथ सभी प्रतिभागियों को भी महत्व
प्रतियोगिता में पुरस्कार जीतना निश्चित रूप से बच्चों के लिए उत्साह का विषय है, लेकिन आयोजन में भाग लेने वाले सभी बच्चों की सहभागिता को भी महत्व दिया गया है।
सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन सहभागिता प्रमाण-पत्र दिए जाने की घोषणा इसी दिशा में एक कदम है। इससे बच्चों को भविष्य में भी ऐसी रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
प्रथम स्थान पर अव्युक्त एवं अविर पंवार, द्वितीय स्थान पर साहिब सिंह और तृतीय पुरस्कार के लिए रिचा शर्मा, श्रेया वर्मा तथा अंशुमान एवं उनके भाई का चयन किया गया है।
इस प्रतियोगिता के जरिए जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक जुड़ाव को एक साथ सामने लाया गया।
जय श्री कृष्ण!
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