NEET का खौफनाक सच: डॉक्टर बनने की जिद में छात्र ने काट डाला अपना पैर!

डिसेबिलिटी कोटे के लिए रची गई वह साजिश, जिसने शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया

Headlinesip.com एक्सक्लूसिव रिपोर्ट | जौनपुर, उत्तर प्रदेश

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आज की यह रिपोर्ट सिर्फ एक अपराध कथा नहीं है, बल्कि हमारे एजुकेशन सिस्टम, प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और युवाओं की मानसिक स्थिति पर एक गहरा सवाल है। यह खबर बताती है कि जब सपना जुनून बन जाए और जुनून विवेक को कुचल दे, तब इंसान किस हद तक जा सकता है।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर से सामने आई यह घटना न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि रूह कंपा देने वाली भी। NEET छात्र का डॉक्टर बनने का सपना, जो कभी सेवा और सम्मान का प्रतीक माना जाता था, उसी सपने ने एक युवक को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया जिसकी कल्पना भी कठिन है।


🩺 डॉक्टर बनने का सपना और दो बार की असफलता

जौनपुर निवासी सूरज भास्कर एक मेधावी छात्र माना जाता था। उसका सपना था MBBS करना और डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना। उसने NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) की तैयारी में सालों खपा दिए, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
लगातार दो बार असफलता ने NEET छात्र के आत्मविश्वास को तोड़ दिया।

सामान्य श्रेणी में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कट-ऑफ का दबाव और “एक और साल” की मानसिक थकान ने उसे अंदर से खोखला कर दिया। यहीं से उसके दिमाग में वह खतरनाक विचार जन्म लेने लगा, जिसने आगे चलकर एक सनसनीखेज साजिश का रूप ले लिया।


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🔪 खौफनाक साजिश: दिव्यांग बनकर MBBS सीट पाने का रास्ता?

सूरज को यह जानकारी मिली कि NEET में PwD (Persons with Disabilities) कोटा होता है, जिसमें अपेक्षाकृत कम अंकों पर भी MBBS सीट मिलने की संभावना रहती है।
यहीं से उसने पढ़ाई का रास्ता छोड़कर शॉर्टकट चुन लिया—एक ऐसा शॉर्टकट, जो उसे जिंदगी भर का दर्द देने वाला था।

उसने खुद को दिव्यांग साबित करने के लिए अपने ही पैर को काट डालने की योजना बना ली। यह कोई दुर्घटना नहीं थी, कोई हमला नहीं था—बल्कि एक सोची-समझी, ठंडे दिमाग से रची गई साजिश थी।


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🤥 परिवार और पुलिस से बोला गया झूठ

घटना के बाद सूरज खून से लथपथ हालत में अपने परिवार के पास पहुँचा। उसने रोते-कराहते हुए दावा किया कि उस पर अज्ञात हमलावरों ने हमला किया है, जिसमें उसका पैर कट गया।
परिवार सदमे में था। बिना देर किए उसे अस्पताल ले जाया गया और पुलिस को सूचना दी गई।

पहली नजर में यह मामला क्राइम अटैक का लग रहा था। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी में दरारें साफ दिखने लगीं।


🚨 पुलिस जांच में खुली सच्चाई

पुलिस और फोरेंसिक टीम ने जब मामले की गहराई से जांच की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • जिस जगह हमले की बात कही गई, वहां संघर्ष के कोई निशान नहीं थे
  • घाव की बनावट ऐसी थी, जो स्वयं द्वारा की गई चोट की ओर इशारा कर रही थी
  • सूरज के बयानों में बार-बार विरोधाभास सामने आ रहा था

कड़ी पूछताछ के बाद सूरज टूट गया। उसने कबूल कर लिया कि यह हमला किसी और ने नहीं, बल्कि उसने खुद किया था
उसका मकसद साफ था—NEET के दिव्यांग कोटे का फायदा उठाकर MBBS सीट हासिल करना।


🏥 फिलहाल क्या है हालत?

इस समय सूरज अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टर उसके पैर को बचाने और संक्रमण फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
विडंबना यह है कि जिस पैर को उसने अपने भविष्य की “सीढ़ी” समझा था, वही अब उसकी जिंदगी भर की मजबूरी बन गया है।

न तो उसे डॉक्टर की सीट मिली, न ही उसका सपना पूरा हुआ। उल्टा, अब वह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक—तीनों स्तर पर एक गहरे संकट में फंस चुका है।


⚠️ शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं मानी जा सकती। यह पूरे सिस्टम के लिए एक वेक-अप कॉल है।

  • क्या प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव जरूरत से ज्यादा नहीं हो गया है?
  • क्या समाज ने “सफलता” की परिभाषा को इतना संकीर्ण बना दिया है कि असफलता मौत से भी बदतर लगने लगी है?
  • और सबसे बड़ा सवाल—क्या शॉर्टकट की यह संस्कृति युवाओं को आत्मघाती फैसलों की ओर नहीं धकेल रही?

Headlinesip मानता है NEET छात्र कि यह खबर हमें संवेदना, सुधार और आत्ममंथन—तीनों की जरूरत का एहसास कराती है।
डॉक्टर बनना एक सम्मानजनक लक्ष्य है, लेकिन जिंदगी से बड़ा कोई करियर नहीं
दिव्यांग कोटा उन लोगों के लिए है, जो वास्तव में जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं—न कि उन लोगों के लिए, जो सिस्टम को धोखा देने के लिए खुद को नुकसान पहुँचा लें।

समय आ गया है कि शिक्षा, परिवार और समाज मिलकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही प्राथमिकता दें, जितनी रैंक और रिजल्ट को दी जाती है।

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