77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर ओडिशा के कोरापुट जिले से प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा और सख्त निर्णय सामने आया है। जिला कलेक्टर एवं जिलाधिकारी (DM) ने जिले के सभी तहसीलदारों, सभी ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (BDO) और सभी नगर निकायों के कार्यकारी अधिकारियों को आधिकारिक पत्र जारी करते हुए निर्देश दिया है कि 26 जनवरी 2026 को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में मांस, चिकन, मछली, अंडा और अन्य सभी प्रकार के नॉन-वेज खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
यह आदेश गणतंत्र दिवस की गरिमा, राष्ट्रीय एकता और सार्वजनिक आयोजनों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है।
🇮🇳 गणतंत्र दिवस की मर्यादा को लेकर प्रशासन सख्त
कलेक्टर द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 26 जनवरी को पूरे जिले में सरकारी, अर्ध-सरकारी, शैक्षणिक और सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजन होंगे। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर नॉन-वेज खाद्य पदार्थों की खुलेआम बिक्री को अनुचित और असंगत माना गया है।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह का प्रतिबंध
- कार्यक्रमों की पवित्रता बनाए रखने
- किसी भी प्रकार के सामाजिक या धार्मिक विवाद से बचने
- कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में रखने
के लिए आवश्यक है।
📜 किस-किस पर लागू होगा आदेश?
जारी निर्देशों के अनुसार यह प्रतिबंध निम्न सभी पर समान रूप से लागू होगा:
- मांस, चिकन, मछली और अंडे की दुकानें
- होटल, ढाबे और रेस्तरां
- ठेले, अस्थायी दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर्स
- शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र
सभी तहसीलदारों, BDO और Executive Officers को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में लिखित आदेश जारी करें, मुनादी कराएं और निगरानी सुनिश्चित करें।
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🚨 उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आदेश का उल्लंघन करने वालों पर:
- ओडिशा म्युनिसिपल एक्ट
- लोक व्यवस्था अधिनियम
- और अन्य प्रासंगिक कानूनी धाराओं
के तहत जुर्माना, दुकान सील करने और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय पुलिस और नगर निकायों को संयुक्त निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए हैं।
🗣️ प्रशासन का स्पष्ट संदेश
जिला प्रशासन का संदेश साफ है—
“यह प्रतिबंध किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्व की गरिमा और सामूहिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से है।”
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि आदेश के क्रियान्वयन में संवेदनशीलता और संतुलन रखा जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक टकराव की स्थिति न बने।
📊 पहले भी लिए जा चुके हैं ऐसे फैसले
गौरतलब है कि इससे पहले भी देश के कई राज्यों और जिलों में
- गणतंत्र दिवस,
- स्वतंत्रता दिवस,
- गांधी जयंती
जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर नॉन-वेज बिक्री पर अस्थायी रोक लगाई जाती रही है। प्रशासनिक हलकों में इसे प्रचलित और स्वीकार्य व्यवस्था माना जाता है।
🔍 राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया पर नजर
फिलहाल इस आदेश को लेकर कोई बड़ा विरोध सामने नहीं आया है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रियाओं को मॉनिटर किया जा रहा है।
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