उत्तराखंड में कुदरत की चुनौती, SDRF बना सुरक्षा कवच
23 जनवरी 2026 की रात उत्तराखंड के उच्च हिमालयी इलाकों में अचानक हुई भारी बर्फबारी ने आम जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया। नैनीताल, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में तापमान गिरने के साथ-साथ सड़कों पर मोटी बर्फ जम गई, जिससे दर्जनों वाहन और सैकड़ों यात्री रास्तों में फंस गए।
हालात गंभीर थे। अंधेरी रात, लगातार गिरती बर्फ और फिसलन भरे मार्ग—ऐसे में State Disaster Response Force (SDRF) ने एक बार फिर यह साबित किया कि आपदा के समय वही सबसे भरोसेमंद ढाल है।
नैनीताल में अलर्ट मोड: रामगढ़–मुक्तेश्वर और धानाचुली बना चुनौती क्षेत्र
जैसे ही जिला नियंत्रण कक्ष नैनीताल और जिला आपदा प्रबंधन विभाग को बर्फ में फंसे वाहनों की सूचना मिली, SDRF को तत्काल अलर्ट किया गया।
रामगढ़–मुक्तेश्वर मार्ग और धानाचुली बैंड क्षेत्र में हालात सबसे ज्यादा खराब थे।
JCB के साथ संयुक्त ऑपरेशन
SDRF टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय प्रशासन के सहयोग से JCB मशीन की मदद ली। कई घंटे की मशक्कत के बाद सड़क से बर्फ हटाई गई और लगभग 20–25 वाहनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
इन वाहनों में पर्यटक, स्थानीय ग्रामीण और परिवार शामिल थे, जो रात के समय रास्ता बंद होने से पूरी तरह फंस गए थे।
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टिहरी गढ़वाल: शादी से लौट रहे लोग बर्फ में फंसे, SDRF ने सुरक्षित निकाला
टिहरी गढ़वाल जिले के घनसाली क्षेत्र में मयाली रोड के पास बडियार गांव के नजदीक स्थिति और भी संवेदनशील हो गई।
यहाँ एक वाहन में सवार 8 लोग, जो विवाह समारोह से लौट रहे थे, अचानक भारी बर्फबारी के कारण रास्ते में फंस गए।
SDRF पोस्ट घनसाली की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही SDRF पोस्ट घनसाली की टीम मौके पर पहुंची। संकरी सड़क, फिसलन और अंधेरे के बावजूद टीम ने पूरे संयम और कौशल के साथ वाहन समेत सभी 8 व्यक्तियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर घनसाली सुरक्षित पहुंचाया।
स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को “देवदूत जैसी मदद” बताया।
उत्तरकाशी: लंबगांव मोटर मार्ग पर सबसे बड़ा रेस्क्यू
उत्तरकाशी जिले में हालात सबसे व्यापक थे। लंबगांव मोटर मार्ग के चौरंगी क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया और करीब 75 लोग अलग-अलग स्थानों पर फंस गए।
मुख्यालय उजेली की बड़ी भूमिका
SDRF मुख्यालय उजेली, उत्तरकाशी से तैनात टीमों ने चरणबद्ध तरीके से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
कई घंटों तक चले इस ऑपरेशन में सभी फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
महत्वपूर्ण बात यह रही कि:
- कोई जनहानि नहीं हुई
- किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली
- सभी लोगों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया
समन्वय, अनुशासन और अनुभव—SDRF की कार्यशैली
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में जो बात सबसे ज्यादा उभरकर सामने आई, वह था SDRF का समन्वित और पेशेवर दृष्टिकोण।
जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय संसाधनों के साथ तालमेल बैठाकर SDRF ने यह सुनिश्चित किया कि राहत कार्य बिना किसी अव्यवस्था के पूरे हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह त्वरित कार्रवाई न होती, तो हालात जानलेवा भी हो सकते थे।
प्रशासन की अपील: अनावश्यक यात्रा से बचें
लगातार मौसम खराब रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि:
- ऊँचाई वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा न करें
- मौसम अपडेट पर नजर रखें
- आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन को सूचना दें
आपदा में भरोसे का नाम – SDRF
उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में आपदा प्रबंधन केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन रेखा है।
23 जनवरी की रात हुई यह कार्रवाई एक बार फिर यह साबित करती है कि SDRF सिर्फ एक बल नहीं, बल्कि संकट में फंसे लोगों के लिए भरोसे का नाम है।
भारी बर्फबारी, अंधेरी रात और दुर्गम रास्तों के बीच SDRF की यह त्वरित और प्रभावी कार्रवाई निश्चित रूप से सराहना के योग्य है।


