टिहरी | 29 जनवरी 2026
देवभूमि उत्तराखंड के टिहरी जिले में आयोजित एक्रो फेस्टिवल एवं SIV चैंपियनशिप टिहरी 2026 के दौरान गुरुवार को एक बड़ा हादसा SDRF की मुस्तैदी से होते-होते टल गया। पैराग्लाइडिंग गतिविधियों के दौरान दो पैराग्लाइडर पायलट अनियंत्रित होकर टिहरी झील में गिर गए, जिससे मौके पर मौजूद दर्शकों और आयोजन से जुड़े लोगों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई।
हालांकि, पहले से मुस्तैद राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की तत्परता और पेशेवर कार्यशैली के चलते यह संभावित हादसा जानलेवा बनने से पहले ही टल गया।
🚨 कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, 29 जनवरी 2026 को टिहरी झील क्षेत्र में चल रही पैराग्लाइडिंग गतिविधियों के दौरान अचानक हवा के रुख में बदलाव और तकनीकी संतुलन बिगड़ने के कारण दो पायलट नियंत्रण खो बैठे। देखते ही देखते दोनों पैराग्लाइडर झील की ओर गिर गए।
यह घटना उस समय हुई जब प्रतियोगिता अपने नियमित चरण में चल रही थी और झील के आसपास बड़ी संख्या में प्रतिभागी व आयोजक मौजूद थे।
🛟 SDRF की पहले से थी तैनाती
आयोजन की संवेदनशीलता और सुरक्षा मानकों को देखते हुए प्रतापनगर क्षेत्र एवं टिहरी झील में SDRF की विशेष रेस्क्यू टीमें पहले से तैनात थीं।
यही पूर्व तैयारी इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुई।
जैसे ही पायलटों के झील में गिरने की सूचना मिली, मौके पर मौजूद SDRF टीम ने बिना समय गंवाए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया।
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⚡ त्वरित और समन्वित रेस्क्यू ऑपरेशन
SDRF की टीम ने उच्च स्तर का समन्वय दिखाते हुए:
- तुरंत झील में पहुंच बनाई
- विशेष रेस्क्यू उपकरणों का इस्तेमाल किया
- दोनों पायलटों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित की
कुछ ही मिनटों के भीतर दोनों पैराग्लाइडर पायलटों को झील से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
इस दौरान SDRF जवानों की पेशेवर ट्रेनिंग और अनुभव साफ तौर पर देखने को मिला।
🩺 पायलट पूरी तरह सुरक्षित

रेस्क्यू के बाद SDRF द्वारा दोनों पायलटों का प्राथमिक चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।
प्राथमिक जांच में:
- किसी भी प्रकार की गंभीर चोट नहीं पाई गई
- दोनों पायलट पूरी तरह सुरक्षित पाए गए
इसके बाद उन्हें आवश्यक औपचारिकताओं के पश्चात सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया।
🌊 सुरक्षा व्यवस्था की हुई सराहना
इस घटना के बाद आयोजन से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने SDRF की त्वरित कार्रवाई की खुले तौर पर सराहना की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेस्क्यू टीम पहले से तैनात न होती, तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि एडवेंचर स्पोर्ट्स में सुरक्षा प्रबंधन और आपदा तैयारी कितनी जरूरी है।
टिहरी जैसे संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स का आयोजन तभी सफल माना जा सकता है, जब सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
SDRF की तत्परता ने न केवल दो जानें बचाईं, बल्कि उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन क्षमता पर भी भरोसा मजबूत किया है।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन आने वाले आयोजनों के लिए एक बेंचमार्क साबित हो सकता है।
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