उत्तराखंड में उत्तराखंड किसान आत्महत्या का एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और किसान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनपद ऊधमसिंह नगर के काशीपुर क्षेत्र से जुड़े इस प्रकरण में ग्राम पैगा निवासी किसान सुखविंदर सिंह पुत्र तेजा सिंह ने हल्द्वानी के काठगोदाम स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। यह घटना उत्तराखंड में बढ़ते किसान आत्महत्या मामलों, आर्थिक दबाव और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है।
घटना के समय किसान सुखविंदर सिंह ने अपनी पत्नी और 14 वर्षीय पुत्र के साथ भी आत्महत्या का प्रयास किया। इस दर्दनाक घटनाक्रम में सुखविंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी और पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उत्तराखंड किसान आत्महत्या प्रकरण में परिवार के एक साथ आत्मघाती प्रयास ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

सुसाइड वीडियो में सामने आए जमीनी धोखाधड़ी के आरोप
उत्तराखंड किसान आत्महत्या मामले की सबसे अहम कड़ी मृतक द्वारा बनाया गया सुसाइड वीडियो है। वीडियो में सुखविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि काशीपुर में कुछ लोगों ने उनके साथ करोड़ों रुपये की जमीनी हेराफेरी और आर्थिक धोखाधड़ी की। किसान का कहना था कि जमीन से जुड़े इस विवाद ने उन्हें आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया और वे कर्ज व मानसिक तनाव में चले गए। यह मामला किसान जमीन विवाद उत्तराखंड की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
पुलिस पर संरक्षण और उत्पीड़न के आरोप
सुसाइड वीडियो में सुखविंदर सिंह ने ऊधमसिंह नगर पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जब वे धोखाधड़ी की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे, तो उनकी एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें बार-बार थाने बुलाया गया। किसान ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दूसरे पक्ष का साथ दिया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उत्तराखंड किसान आत्महत्या प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर अब सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं।
न्याय न मिलने से टूटा भरोसा
लगातार आर्थिक नुकसान, जमीन विवाद, पुलिस कार्रवाई न होना और प्रशासनिक उपेक्षा ने किसान को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। वीडियो में साफ झलकता है कि उत्तराखंड किसान आत्महत्या के इस मामले में किसान का न्याय व्यवस्था और सिस्टम से भरोसा खत्म हो चुका था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई न होना आत्मघाती कदम की बड़ी वजह बनता है।
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सीबीआई जांच की मांग, व्यवस्था पर तीखा सवाल
सुसाइड वीडियो के अंत में सुखविंदर सिंह ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने भावनात्मक रूप से यह भी कहा कि उनके और उनके परिवार के शवों को बेचकर जो पैसा मिले, वह पुलिस को दे दिया जाए। यह बयान उत्तराखंड किसान आत्महत्या के पीछे छिपी गहरी पीड़ा और व्यवस्था के प्रति आक्रोश को दर्शाता है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
घटना सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। उत्तराखंड किसान आत्महत्या का यह मामला अब केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि किसान उत्पीड़न, पुलिस जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की बड़ी परीक्षा बन गया है। स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है