देहरादून, 27 फरवरी 2026। वसंतोत्सव 2026
उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक आत्मा एक बार फिर अपने पूरे वैभव के साथ सामने आई, जब लोक भवन सूचना परिसर, देहरादून में वसंतोत्सव 2026 के प्रथम दिवस पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
यह सांस्कृतिक संध्या न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी, बल्कि उत्तराखण्ड की लोक परंपराओं, जनजातीय जीवन और लोकभावनाओं का जीवंत दस्तावेज भी साबित हुई।
🎭 लोक भवन में सजी उत्तराखण्ड की लोक विरासत
संस्कृति विभाग, उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य की विविध लोक परंपराओं को मंच पर उतारा गया। कुमाऊँ, गढ़वाल, जौनसार-बावर और थारू जनजाति की सांस्कृतिक झलक ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
मंच से प्रस्तुत हर गीत और नृत्य उत्तराखण्ड के ग्रामीण जीवन, प्रकृति-प्रेम और सामूहिक संस्कृति की कहानी कहता नजर आया।
🎶 इन लोक प्रस्तुतियों ने लूटी महफिल
सांस्कृतिक संध्या के दौरान निम्न प्रमुख लोकगीतों और प्रस्तुतियों ने दर्शकों की विशेष सराहना बटोरी—
- कुमाऊँनी छपेली लोकगीत: “गोरख्या चेली भागुली”
- गढ़वाली लोकगीत: “मेरा बाजू रंगा रंग बिचारी”
- जौनसारी छोड़े लोकगीत: “को देश को बटोई”
- थारू जनजाति लोकगीत (खेती-खलिहान आधारित): “देखो गांव के किनारे”
- कुमाऊँनी बैठकी होली: “मेरी नथ गढ़ दे”
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से पहाड़ की मिट्टी, खेत-खलिहान, रिश्तों की गर्माहट और लोकजीवन की सादगी मंच पर सजीव हो उठी।
🌿 लोक संस्कृति का जीवंत चित्रण
कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और सजीव भाव-भंगिमाओं के साथ ऐसा वातावरण रचा कि दर्शक स्वयं को उत्तराखण्ड के किसी गांव के आंगन में खड़ा महसूस करने लगे।
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने हर प्रस्तुति को तालियों और उत्साह के साथ सराहा। यह स्पष्ट संकेत था कि आधुनिक दौर में भी लोक संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी और मजबूत हैं।
🏛️ राज्यपाल की उपस्थिति ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। उनके साथ—
- प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर
- सचिव, राज्यपाल रविनाथ रामन
- सचिव, संस्कृति युगल किशोर पंत
- अपर सचिव, राज्यपाल श्रीमती रीना जोशी
- निदेशक, उद्यान एस. एल. सेमवाल
सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
भारत-जेन AI पर राज्यपाल की मुहर
🌸 वसंतोत्सव 2026: परंपरा और भविष्य का संगम
वसंतोत्सव-2026 केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की पहचान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास है। ऐसे आयोजन न सिर्फ लोक कलाकारों को मंच देते हैं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
📌 क्यों जरूरी हैं ऐसे सांस्कृतिक आयोजन?
- लोक कलाकारों को सम्मान और पहचान
- युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम
- पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा
- उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक ब्रांडिंग
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Amitendra Sharma is a digital news editor and media professional with a strong focus on credible journalism, public-interest reporting, and real-time news coverage. He actively works on delivering accurate, fact-checked, and reader-centric news related to Uttarakhand, governance, weather updates, and socio-political developments.
