बारिश का कहर: उत्तराखंड डूबने की कगार पर, देहरादून समेत सात जिलों में बाढ़ का खतरा

देहरादून, 2 सितंबर 2025

देवभूमि उत्तराखंड पर आसमान का कहर टूट पड़ा है। मौसम विभाग (IMD) ने चेताया है कि आने वाले 48 घंटे प्रदेश के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। सात जिलों — देहरादून, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी — में ऐसी बारिश होगी जो जिंदगी को थामकर रख सकती है।

पहाड़ों पर मंडराया खतरा

पहाड़ों में इस वक्त हालात बेहद नाजुक हैं। आसमान से लगातार पानी बरस रहा है, नदियां उफान पर हैं और गांव-गांव में डर का साया गहराने लगा है। नैनीताल के लोग याद कर रहे हैं पिछले साल की बारिश का वो मंजर, जब झील का पानी किनारे तोड़कर सड़कों में घुस गया था। रुद्रप्रयाग और चमोली के पहाड़ी रास्तों पर छोटे-छोटे भूस्खलन अब आम हो गए हैं, लेकिन इस बार खतरा कई गुना बढ़ा हुआ है।

सरकार अलर्ट पर, प्रशासन की टेंशन

सरकार ने जिलाधिकारियों को साफ आदेश दिए हैं — मुख्यालय से हिलना मत, मोबाइल बंद मत करना और कंट्रोल रूम हर वक्त चालू रहना चाहिए।
ग्रामीण इलाकों में PWD और PMGSY की टीमें तैनात हैं ताकि अगर सड़कें बंद हों तो तुरंत रास्ता खोला जा सके। बच्चों की सुरक्षा के लिए पहाड़ों के स्कूलों को कभी भी बंद करने का ऐलान हो सकता है।

पर्यटकों से अपील

टूरिस्टों के लिए ये वक्त रोमांचक नहीं, बल्कि खतरनाक है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि नदी-नालों के पास जाना जान जोखिम में डालना है। पिछले साल कांवड़ यात्रा के दौरान एक पल की लापरवाही से कई लोग तेज धारा में बह गए थे, और प्रशासन इस बार वैसा हादसा दोहराना नहीं चाहता।

जनता का डर और उम्मीद

गांवों के लोग आजकल आसमान की तरफ देखकर अंदाजा लगाने लगे हैं कि आगे क्या होगा। देहरादून की सीमा देवी, जो गंगा किनारे रहती हैं, कहती हैं —
“पिछली बार जब बाढ़ आई थी तो हमें रातभर घर छोड़कर स्कूल में शरण लेनी पड़ी थी। इस बार भगवान से दुआ कर रहे हैं कि हालात उतने खराब न हों।”

इसी बीच आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार अलर्ट पर हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी किए जा चुके हैं और राहत दल हर वक्त तैयार हैं।

आने वाले घंटे होंगे निर्णायक

उत्तराखंड इन दिनों एक ऐसी घड़ी से गुजर रहा है, जब हर घर, हर परिवार की सांसें थमी हुई हैं। सवाल यही है कि क्या प्रशासन की चौकसी और जनता की सावधानी मिलकर इस बारिश के कहर को मात दे पाएगी, या फिर पहाड़ों पर एक बार फिर प्रकृति का प्रकोप हावी होगा।

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