– विशेष रिपोर्ट |
राजस्थान की बहुप्रतीक्षित और महत्त्वाकांक्षी राम जल सेतु लिंक परियोजना (संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना) के विभिन्न निर्माण स्थलों का मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को हवाई निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन ईसरदा बांध, नवनेरा बैराज, और चम्बल नदी पर बन रहे एक्वाडक्ट के कार्यों का गहन अवलोकन किया और अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली।
निरीक्षण के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा:
“हम पानी के क्षेत्र में राजस्थान को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं। राम जल सेतु परियोजना इसी दिशा में हमारी संकल्पबद्धता का प्रतीक है।” – @bhajanlalbjp
एक्वाडक्ट और जल संरचनाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने परियोजना के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण चम्बल नदी पर एक्वाडक्ट की प्रगति की समीक्षा की। यह एक्वाडक्ट परियोजना की जीवनरेखा माना जा रहा है, जो विभिन्न जल स्रोतों को जोड़ते हुए राज्य के अनेक जिलों में जल आपूर्ति और सिंचाई को नया जीवन देगा।
नवनेरा बैराज और ईसरदा बांध की स्थिति
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने ईसरदा बांध की संरचनात्मक मजबूती, जलग्रहण क्षेत्र और स्थानीय प्रभावों का जायजा लिया, वहीं नवनिर्मित नवनेरा बैराज के संचालन और जल वितरण प्रणाली को कार्यान्वयन के लिए तैयार बताया गया। अधिकारियों ने अवगत कराया कि इन संरचनाओं से जल संरक्षण, आपूर्ति और सिंचाई क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलेगा।
पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य सिर्फ जल वितरण नहीं, बल्कि ग्राम्य राजस्थान में समृद्धि, हरियाली और स्थिरता लाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्ता-प्रधान हों।
विश्व पर्यावरण दिवस पर जल संरक्षण का संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस 2025 के अवसर पर मुख्यमंत्री ने जल-संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता पर बल देते हुए जनता से आह्वान किया कि वे जल के महत्त्व को समझें और पानी बचाने की संस्कृति को अपनाएँ।

राम जल सेतु परियोजना:
यह योजना पार्वती, कालीसिंध और चम्बल नदियों को एक जल तंत्र से जोड़कर राज्य के जल-वंचित क्षेत्रों में नई जान फूंकेगी। सिंचाई, पेयजल, पर्यावरणीय स्थिरता और भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में यह परियोजना क्रांतिकारी सिद्ध हो सकती है।