“ए व्यू फ्रॉम विदिन” का लोकार्पण — ईमानदार लोकसेवा की दास्तान, आईएएस राजेन्द्र भाणावत के अनुभवों से सजा दस्तावेज़

राजस्थान में साहित्य और प्रशासन का संगम

जयपुर। पूर्व आईएएस अधिकारी, कवि और संपादक राजेन्द्र भाणावत की बहुचर्चित पुस्तक “A View from Within” का लोकार्पण शनिवार को राजस्थान प्रौढ़ शिक्षा समिति के सभागार में एक गरिमामय समारोह में हुआ। इस अवसर पर पद्मभूषण से सम्मानित और बी.एस.ई. (भारत) के संस्थापक डी.आर. मेहता ने मुख्य अतिथि के रूप में पुस्तक का विमोचन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में लेखक राजेन्द्र भाणावत ने उपस्थित अतिथियों और साहित्यप्रेमियों का भावभीना स्वागत किया। उनके इस आत्मीय संबोधन ने पूरे सभागार को आत्मीयता और सौहार्द से भर दिया।


“ईमानदारी से की गई जनसेवा का जीवंत दस्तावेज़” — डी.आर. मेहता

मुख्य अतिथि डी.आर. मेहता ने कहा कि यह पुस्तक केवल संस्मरणों का संकलन नहीं है, बल्कि ईमानदारी से की गई लोकसेवा और वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का जीवंत दस्तावेज़ है। उन्होंने कहा कि भाणावत जैसे अधिकारी यह याद दिलाते हैं कि प्रशासन में भी संवेदना और प्रतिबद्धता जीवित रह सकती है, बशर्ते व्यक्ति अपने मूल्यों से समझौता न करे।


वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और चिंतकों की भावनाएं

समारोह में अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, साहित्यकार और पत्रकार मौजूद थे।
पूर्व वरिष्ठ आईएएस एन.एस. सिसोदिया ने कहा कि भाणावत ने अपने कार्यकाल में ईमानदारी की कीमत चुकाई, लेकिन कभी अपने कर्तव्यपथ से विचलित नहीं हुए।
वहीं, वरिष्ठ चिंतक आई.सी. श्रीवास्तव ने कहा, “जब आप बिना सिफारिश के आम आदमी के लिए काम करते हैं, तो कई लोगों को तकलीफ होती है, और तबादलों का उपहार मिलता है। लेकिन भाणावत जी ने इस चुनौती को अपनी पहचान बना लिया।”

पूर्व कुलपति डॉ. अशोक कुमार ने उन्हें छात्र हितों के संरक्षक के रूप में याद किया, जबकि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि “भाणावत की लेखनी आत्मप्रशंसा से मुक्त और सच्चाई से भरी है।”


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“भाणावत ईमानदार प्रशासनिक लेखन के प्रवक्ता” — वक्ताओं की राय

पूर्व आईएएस एस.एस. बिस्सा ने कहा कि यह पुस्तक लेखक और लोकसेवक दोनों रूपों में भाणावत की पहचान को सशक्त करती है
लेखक राजेन्द्र मोहन शर्मा ने याद किया कि उनके कार्यकाल में राजस्थान ने साक्षरता के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की थी

सोशल एक्टिविस्ट कविता श्रीवास्तव ने भाणावत को सहजता की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि “वे आम आदमी के अधिकारी रहे, जिनके दरवाज़े सदैव जनता के लिए खुले रहे।”
वरिष्ठ पत्रकार सन्नी सेबेस्टियन ने कहा कि यह पुस्तक “आम जन के हित में काम करने वालों के लिए प्रेरणा स्रोत है।”
प्रोफेसर लाड़ कुमारी जैन ने उन्हें सफलता का श्रेय हमेशा साथियों को देने वाला विनम्र व्यक्तित्व बताया।


न्यायमूर्ति पानाचन्द जैन का उद्बोधन

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति पानाचन्द जैन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा, “महात्मा कितना ही बड़ा क्यों न हो, यदि उसके आचरण में शुचिता नहीं है, तो सब व्यर्थ है। भाणावत जी उस दुर्लभ ईमानदारी और शुचिता की प्रतिमूर्ति हैं।”


साहित्य, सेवा और संवेदना का संगम

कार्यक्रम में पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, वरिष्ठ साहित्यकारों, शिक्षाविदों और पत्रकारों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने यह साबित किया कि “A View from Within” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि लोकसेवा में मानवीय दृष्टिकोण का दस्तावेज़ है

समारोह का संचालन समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र बोड़ा ने किया, जबकि अंत में अनिता भाणावत ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह कार्यक्रम प्रशासनिक जीवन के उस उजले पक्ष की झलक दिखाता है, जहां संवेदना, सिद्धांत और सेवा एक साथ चलते हैं—और यही भाणावत की “A View from Within” का सार है।


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