मसूरी | 14 जून 2025
खलंगा रिजर्व फ़ॉरेस्ट के भीतर गेट और फेंसिंग निर्माण के वायरल वीडियो पर मसूरी वन प्रभाग ने आज औपचारिक प्रेस नोट जारी किया है, जिसमें पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए अब तक की प्रशासनिक कार्रवाई का ब्योरा दिया गया है।
क्या था मामला?

13 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति स्वयं को ठेकेदार बताते हुए यह दावा कर रहा था कि यह जमीन ऋषिकेश निवासी अशोक अग्रवाल की है और वह यहां 40 बीघा भूमि पर गेट व फेंसिंग का निर्माण करवा रहे हैं। वीडियो में दिख रहा क्षेत्र खलंगा रिजर्व फ़ॉरेस्ट के भीतर आता है और वहां एक पक्का गेट भी स्थापित पाया गया।

वन विभाग ने क्या कहा?
वन विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार:
- 13 जून को ही वीडियो संज्ञान में आते ही रायपुर रेंज की टीम को मौके पर भेजा गया था।
- मौके पर निर्माण कार्य बिना वन विभाग की अनुमति के पाए जाने पर तत्काल रोक दी गई।
- अगले दिन यानी 14 जून को मसूरी वन प्रभाग के प्रभारी वनाधिकारी, वन पंचायत समिति सदस्य और अन्य अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और निर्माण हटाने की कार्यवाही शुरू की गई।
क्या है भूमि की स्थिति?
जांच के दौरान वन विभाग और राजस्व विभाग के मानचित्रों का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट हुआ कि:
- संबंधित भूमि खसरा नंबर 204 ब, आरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
- यह भूमि गैर-आसील और चक भूमि के रूप में वन भूमि घोषित है।
- भूमि पर निजी स्वामित्व का कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
क्या कार्रवाई हुई?
- फौरन फेंसिंग हटाने और गेट तोड़ने की कार्यवाही की गई।
- पहले भी इस क्षेत्र में अवैध कब्जे के प्रयासों की सूचनाएं मिलती रही थीं।
- एक संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन के तहत प्रभावित क्षेत्र की 0-10 वर्ष से 20-25 वर्ष के वृक्षों की स्थिति का अध्ययन किया गया, जिससे क्षेत्र में पर्यावरणीय नुकसान की पुष्टि हुई है।
- अशोक अग्रवाल द्वारा किया गया दावा वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 का उल्लंघन पाया गया है और उनके विरुद्ध उचित कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है।
क्या आगे होगा?
- घटना की पुनरावृत्ति रोकने हेतु विशेष निगरानी टीम का गठन किया गया है।
- पूरे खलंगा क्षेत्र की वन भूमि की सीमाओं को लेकर अब नवीन सर्वेक्षण एवं सीमांकन कार्य की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है।
वन विभाग की इस त्वरित कार्यवाही से यह साफ़ हो गया है कि खलंगा रिजर्व फ़ॉरेस्ट पर कब्जे की यह कोशिश अवैध थी और किसी भी निजी दावे की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है। अब निगाहें इस पर रहेंगी कि क्या दोषियों पर वास्तव में कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है, या यह मामला भी कागज़ों की खानापूर्ति में दफ्न कर दिया जाएगा।
📌 “खलंगा वन क्षेत्र पर कब्जे की कोशिशें केवल पर्यावरण पर ही नहीं, बल्कि कानून के शासन पर भी कुठाराघात हैं। जनता की जागरूकता और मीडिया की सजगता ही इन हरकतों पर सबसे बड़ा ब्रेक है।”