उत्तराखंड में अब सिर्फ अपील नहीं, बल्कि व्यवहार बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नो व्हीकल डे जैसे फैसले लिए गए हैं, जो आने वाले महीनों में राज्य की जीवनशैली, सरकारी कामकाज और ऊर्जा उपयोग की तस्वीर बदल सकते हैं। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि बढ़ती ईंधन कीमतों, वैश्विक संकट और आर्थिक दबाव के बीच अब “कम खपत, ज्यादा बचत” मॉडल पर तेजी से काम होगा। सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि अब सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव का असर भारत पर लगातार दिखाई दे रहा है। पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल, उर्वरक और ऊर्जा संसाधनों की लागत बढ़ने के कारण केंद्र और राज्य सरकारें अब वैकल्पिक उपायों पर फोकस कर रही हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा नागरिकों से किए गए “छोटे व्यवहारिक बदलाव” के आह्वान को उत्तराखंड सरकार ने नीति स्तर पर लागू करने की शुरुआत कर दी है।
उत्तराखंड में शुरू होगा “नो व्हीकल डे”
कैबिनेट बैठक का सबसे बड़ा फैसला “No Vehicle Day” रहा। सरकार ने तय किया है कि सप्ताह में एक दिन मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और सरकारी अधिकारी घर से काम करेंगे और वाहन उपयोग कम किया जाएगा। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक घटाने का निर्णय लिया गया है।
यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सरकारी खर्च, ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार आम नागरिकों को भी सप्ताह में एक दिन निजी वाहन का उपयोग न करने के लिए प्रेरित करेगी। माना जा रहा है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो उत्तराखंड देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां “सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट” को व्यवहारिक स्तर पर लागू किया गया।
सरकारी दफ्तरों में बढ़ेगा वर्क फ्रॉम होम मॉडल
कैबिनेट ने सरकारी बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र को भी “Work From Home” मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कोविड काल में जिस व्यवस्था को मजबूरी माना गया था, अब उसे ईंधन बचत और ट्रैफिक कम करने के स्थायी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी और निजी क्षेत्र में हाइब्रिड वर्क मॉडल मजबूत हुआ तो इससे पेट्रोल-डीजल की खपत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। सरकार ने सार्वजनिक परिवहन के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया है।

“एक अधिकारी, एक वाहन” नीति से खर्च पर नियंत्रण
राज्य सरकार ने अधिकारियों के वाहन उपयोग पर भी सख्ती दिखाई है। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभाग हैं, उन्हें एक दिन में अधिकतम एक ही वाहन उपयोग करने की अनुमति होगी। यह फैसला सीधे तौर पर सरकारी ईंधन खर्च कम करने और प्रशासनिक अनुशासन बढ़ाने से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक बसों की संख्या और सेवा क्षमता में बढ़ोतरी की जाए ताकि सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों को निजी वाहनों पर कम निर्भर रहना पड़े।
उत्तराखंड में जल्द आएगी नई EV पॉलिसी
धामी सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बड़ा रोडमैप तैयार करने के संकेत दिए हैं। नई EV Policy जल्द लागू की जाएगी, जिसके तहत नए सरकारी वाहनों की खरीद में 50 प्रतिशत वाहन अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक होंगे।
इसके साथ ही राज्यभर में EV Charging Stations का तेजी से विस्तार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन ही ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में EV नेटवर्क मजबूत होता है तो यह पर्यटन और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
AC उपयोग सीमित करने की तैयारी
सरकारी और निजी भवनों में एयर कंडीशनर के सीमित उपयोग की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। ऊर्जा खपत कम करने के लिए सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में बिजली उपयोग की समीक्षा होगी।
सरकार इसे “ऊर्जा अनुशासन” अभियान के रूप में लागू करने की तैयारी में है, ताकि बिजली की बचत के साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाई जा सके।
विदेशी यात्राओं पर नियंत्रण, घरेलू पर्यटन को बढ़ावा
राज्य सरकार ने सरकारी विदेशी यात्राओं को सीमित करने का फैसला किया है। इसके साथ “Visit My State” अभियान के जरिए घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
उत्तराखंड सरकार अब धार्मिक पर्यटन, वेलनेस टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन, इको-टूरिज्म और हेरिटेज सर्किट पर बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाएगी। साथ ही Destination Weddings को बढ़ावा देने और Single Window Clearance सिस्टम लागू करने की दिशा में तेजी लाई जाएगी।
सरकार प्रवासी भारतीयों को भी उत्तराखंड में छुट्टियां बिताने के लिए आकर्षित करने की रणनीति बना रही है। इससे राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
“मेरा भारत, मेरा योगदान” अभियान की तैयारी
सरकार जल्द ही “मेरा भारत, मेरा योगदान” नाम से जन-जागरूकता अभियान शुरू करेगी। इसके तहत स्थानीय उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दिया जाएगा और “Made in State” मॉडल पर काम होगा।
सरकारी खरीद में “Make in India” नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नागरिकों को एक वर्ष तक सोने की खरीद सीमित करने के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश में गोल्ड इंपोर्ट लगातार विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ा रहा है। सरकार चाहती है कि लोग निवेश और उपभोग की आदतों में बदलाव लाएं।
कम तेल वाले भोजन पर जोर
कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य और खाद्य खपत को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। सरकार अब कम तेल वाले भोजन के स्वास्थ्य लाभों पर जनजागरूकता अभियान चलाएगी।
स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में तेल उपयोग की समीक्षा होगी। होटल, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को “Low Oil Menu” अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से अत्यधिक तेल सेवन को हृदय रोग, मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों से जोड़ते रहे हैं। ऐसे में सरकार का यह अभियान स्वास्थ्य सुधार से भी जुड़ा माना जा रहा है।
प्राकृतिक खेती और जैविक मॉडल पर फोकस
धामी सरकार ने किसानों को Natural Farming, Zero Budget Farming और Bio Inputs के प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
स्वच्छ ऊर्जा मिशन पर तेज़ी
राज्य में PNG यानी Piped Natural Gas कनेक्शनों को मिशन मोड में बढ़ाने का फैसला लिया गया है। होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी आवासों में PNG उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके अलावा PM Surya Ghar Yojana के तहत Rooftop Solar को बढ़ावा मिलेगा। गोबर गैस संयंत्रों को लेकर पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभागों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने यह भी तय किया है कि Mining, Solar और Power Projects की मंजूरी प्रक्रिया तेज की जाएगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी 60 दिनों के भीतर प्रस्तावों को मंजूरी देगी।
धामी सरकार ने खोला खजाना! शिक्षा से कुम्भ तक ₹1096 करोड़ की बड़ी सौगात
क्या उत्तराखंड देश के लिए मॉडल बनेगा?
धामी सरकार के ये फैसले केवल प्रशासनिक घोषणाएं नहीं माने जा रहे, बल्कि इन्हें बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच “व्यवहार आधारित अर्थव्यवस्था” की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
यदि “नो व्हीकल डे”, EV मिशन, Work From Home और ऊर्जा बचत मॉडल सफल होते हैं, तो उत्तराखंड देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। आने वाले महीनों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या आम जनता भी सरकार के इस अभियान को उसी गंभीरता से अपनाती है, जिस गंभीरता से इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है।
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