महाकुंभ 2025: आस्था और संस्कृति का महासंगम
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले में हर दिन श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को मेले के पांचवें दिन करीब 20 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। संगम का यह पावन तट गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन गया।
भक्ति में डूबे श्रद्धालु और राजनेता
पांचवे दिन कुंभ मेले की पवित्रता और भक्ति का अनुभव करने के लिए कई प्रमुख हस्तियां भी पहुंचीं।
- भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन ने कुंभ में भाग लिया। उन्होंने संगम तट पर पूजा-अर्चना की और डुबकी लगाकर खुद को धन्य महसूस किया।
- रवि किशन ने कहा, “यहां आकर आत्मा को शांति और ऊर्जा मिलती है। संगम में डुबकी लगाना हर भारतीय के लिए सौभाग्य की बात है।”
आज, 18 जनवरी को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का भी प्रयागराज आगमन होगा। वे गंगा संगम स्नान के साथ ही अक्षयवट, पातालपुरी, सरस्वती कूप व हनुमान मंदिर आदि मंदिरों में पूजा पाठ करेंगे।
वे कुंभ मेले का दौरा कर 29 जनवरी को मौनी अमावस्या पर होने वाले शाही स्नान की तैयारियों का जायजा लेंगे।
संगम में उमड़ी आस्था की लहर
महाकुंभ का हर दिन विशेष होता है, लेकिन शुक्रवार को संगम तट पर भक्तों की भीड़ अद्भुत थी। लाखों लोगों ने सुबह से लेकर शाम तक गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाई। भक्तों का मानना है कि संगम में स्नान से पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है।
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने संगम तट पर पूजन, हवन और दान का पुण्य अर्जित किया। मेले में साधु-संतों और अखाड़ों का भी विशेष आकर्षण है, जो भक्तों को अध्यात्म और धर्म का संदेश दे रहे हैं।
संस्कृति का महाकुंभ: कला और संगीत का संगम
महाकुंभ 2025 केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और कला का भी उत्सव है। गंगा पंडाल में आयोजित हो रहे ‘संस्कृति का महाकुंभ’ कार्यक्रम में देशभर के लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं।
- लोक गायिका पार्वती बाउल की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति ने दर्शकों को आध्यात्मिकता और संगीत के गहरे अनुभव से जोड़ा।
- पारंपरिक नृत्य, गायन और वाद्य यंत्रों की धुनों ने मेले की भव्यता को और बढ़ा दिया।
शाही स्नान की तैयारियां जोरों पर
महाकुंभ मेले का मुख्य आकर्षण मौनी अमावस्या पर होने वाला शाही स्नान है, जो 29 जनवरी को होगा। इसे लेकर प्रशासन और साधु-संतों के अखाड़े तैयारियों में जुट गए हैं।
- संगम क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
- लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन और ठहरने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के दौरे से इन तैयारियों को और गति मिलने की उम्मीद है।
महाकुंभ: आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक
महाकुंभ न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, एकता और भक्ति का प्रतीक भी है। यहां हर जाति, धर्म और क्षेत्र के लोग एक साथ आकर अपने आराध्य की पूजा करते हैं और गंगा-जमुनी तहजीब का अनुभव करते हैं।
इस बार का महाकुंभ मेले ने एक बार फिर साबित किया है कि यह न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। जैसे-जैसे मौनी अमावस्या का दिन नजदीक आ रहा है, श्रद्धालुओं और पर्यटकों का उत्साह और बढ़ता जा रहा है।
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