राजस्थान में सियासी भूचाल! संकट में भजनलाल सरकार, PMO की रडार पर CM

जयपुर/नई दिल्ली – क्या राजस्थान की सियासत किसी खतरनाक मोड़ पर है? क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की कुर्सी खतरे में है? और सबसे बड़ा सवाल – क्यों अचानक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राजस्थान सरकार के कामकाज पर कड़ी नजर रखना शुरू कर दिया है?

इन सवालों ने राजधानी से जयपुर तक के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों की मानें तो राजस्थान में सब कुछ वैसा नहीं चल रहा जैसा ऊपर से दिखाया जा रहा है।


पीएमओ का अलर्ट मोड: इंटेलिजेंस इनपुट या सत्ता की चाल?

जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय ने कुछ हफ्ते पहले ही राजस्थान सरकार से संबंधित सभी गतिविधियों की बारीकी से निगरानी शुरू की है। बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय और इंटेलिजेंस एजेंसियों से लगातार रिपोर्ट्स PMO को भेजी जा रही हैं। इनमें प्रशासनिक लापरवाही, योजनाओं में भ्रष्टाचार की आशंकाएं और राजनीतिक असंतोष की फुसफुसाहटें शामिल हैं।

सूत्र दावा कर रहे हैं कि राजस्थान में कुछ बड़े अधिकारी और मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर केंद्र में असंतोष है – और यही वजह है कि सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय ने फाइलें scrutinize करना शुरू कर दिया है।


भजनलाल शर्मा पर दबाव, CM रेस में कौन-कौन?

भजनलाल शर्मा, जिन्हें हाईकमान ने अचानक सीएम बना सबको चौंका दिया था, अब फिर से रडार पर हैं। पार्टी के ही कुछ नेता खुलकर नहीं, लेकिन निजी बैठकों में अब उनके नेतृत्व को “अनुभवहीन” और “अनुत्पादक” बता रहे हैं।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ नेता ने बताया:
“कई ज़िलों में शासन ठप है, अफसरशाही बेलगाम हो चुकी है और ज़मीन पर काम ज़ीरो है। अगर ये हालात नहीं बदले तो चुनाव से पहले बहुत कुछ बदल सकता है।”

कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि भाजपा में कुछ पुराने चेहरों की लॉबी फिर सक्रिय हो गई है और सीएम चेहरा बदलने की मुहिम दिल्ली तक पहुंच चुकी है।


जयपुर दरबार में बढ़ता बेचैनी का ताप

राजस्थान सचिवालय में भी अफवाहों का बाजार गर्म है। अफसर वर्ग एक तरफ चुपचाप काम कर रहा है, तो दूसरी तरफ लगातार बढ़ रही जांचों और निर्देशों से घबराया भी हुआ है। कई विभागों को हाल ही में PMO से अप्रत्याशित सवाल मिले हैं – जैसे प्रोजेक्ट्स की प्रगति रिपोर्ट, बजट उपयोगिता, और फील्ड विज़िट की प्रमाणिकता।

एक अफसर ने बताया:
“ऐसा पहली बार हो रहा है कि मंत्रालय की रूटीन मीटिंग की डिटेल्स सीधे दिल्ली से मांगी जा रही हैं। यह सिर्फ मॉनिटरिंग नहीं, कुछ बड़ा पक रहा है।”


बीजेपी के अंदरूनी समीकरण और दिल्ली का गेमप्लान?

राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह सिर्फ प्रशासनिक असंतोष की कहानी नहीं है। दिल्ली दरबार में राजस्थान को लेकर दो राय चल रही हैं – एक जो भजनलाल शर्मा को “संघ-प्रशस्त नेतृत्व” मानती है, और दूसरी जो “जनता से जुड़ा चेहरा” चाहती है। इस मतभेद का असर अब राज्य की राजनीति में दिखाई देने लगा है।

कुछ जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी अब राज्य सरकारों के परफॉर्मेंस के आधार पर चेहरों की अदला-बदली की रणनीति पर काम कर रही है – और राजस्थान उसका पहला केस बन सकता है।


कांग्रेस की चुप्पी या रणनीति?

दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष यानी कांग्रेस इन घटनाओं पर चुप है – या यूं कहें कि सोच-समझ कर चुप है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अंदर ही अंदर भजनलाल सरकार की फजीहत का फायदा उठाने की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर भाजपा में सीएम चेहरा बदला गया, तो कांग्रेस इसे “स्थिरता की विफलता” करार दे चुनावी मुद्दा बना सकती है।


अंत में सवाल वही: क्या कुछ बड़ा होने वाला है?

राजस्थान की सत्ता के गलियारों में अब हर कोई यह ही फुसफुसा रहा है – “क्या मुख्यमंत्री बदलने वाले हैं?”, “क्या दिल्ली सरकार को राज्य में कोई बड़ा खतरा महसूस हो रहा है?”, और सबसे अहम – “क्या 2025 के भीतर राजस्थान बीजेपी में भूचाल आने वाला है?”

राजनीति की इस बिसात पर अब सबकी नजरें दिल्ली की ओर हैं। और जब प्रधानमंत्री कार्यालय खुद मैदान में उतर जाए, तो समझ लीजिए – खेल सिर्फ शुरू हुआ है, अंजाम अभी बाकी है।

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