भारतीय बैंकों ने Minimum Balance Charges से कमाए ₹7,100 करोड़, क्या ग्राहकों पर बढ़ रहा है अतिरिक्त बोझ?
वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारतीय बैंकों ने Minimum Balance Charges के रूप में ग्राहकों से करीब ₹7,100 करोड़ वसूले। संसद में सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस राशि का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र के बैंकों से आया। HDFC Bank ने सबसे अधिक ₹1,798.14 करोड़, जबकि Axis Bank ने ₹1,081.33 करोड़ Minimum Balance Charges के रूप में वसूले। दूसरी ओर, कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) अपने नियमित बचत खातों पर ऐसे शुल्क समाप्त कर चुके हैं।
यह खुलासा ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल बैंकिंग, जीरो-बैलेंस खातों और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या Minimum Balance Charges ग्राहकों के लिए उचित हैं या यह बैंकों की अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत बन चुके हैं।
Minimum Balance Charges क्या हैं?
Minimum Balance Charges वह शुल्क है जो बैंक तब वसूलते हैं जब ग्राहक अपने बचत या चालू खाते में निर्धारित न्यूनतम औसत मासिक शेष (Minimum Average Balance – MAB) बनाए नहीं रखते।
हालांकि सभी खातों पर यह नियम लागू नहीं होता। Basic Savings Bank Deposit Account (BSBDA) और प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के खातों पर न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की कोई बाध्यता नहीं है और इन पर ऐसे दंडात्मक शुल्क नहीं लगाए जाते।
निजी बैंकों का दबदबा
संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार FY26 में:
- कुल वसूली: लगभग ₹7,086 करोड़ (करीब ₹7,100 करोड़)
- निजी बैंकों की वसूली: ₹4,948.71 करोड़
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वसूली: ₹2,137.92 करोड़
- HDFC Bank: ₹1,798.14 करोड़
- Axis Bank: ₹1,081.33 करोड़
केवल HDFC Bank और Axis Bank ने मिलकर निजी बैंकों द्वारा वसूली गई राशि का लगभग 58% हिस्सा जुटाया।
कई सरकारी बैंकों ने क्यों हटाए ये शुल्क?
पिछले कुछ वर्षों में अधिकांश सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सामान्य बचत खातों पर Minimum Balance Charges समाप्त कर दिए हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम करना और बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है। हालांकि कुछ विशेष प्रकार के खातों में बैंक की नीति के अनुसार अलग नियम लागू हो सकते हैं।
सरकार और RBI का क्या कहना है?
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि जन धन खाते और Basic Savings Bank Deposit Accounts पर किसी भी प्रकार का Minimum Balance Charge नहीं लगाया जाता।
RBI बैंकों को गैर-BSBDA खातों के लिए बोर्ड-अनुमोदित नीति के तहत सेवा शुल्क तय करने की अनुमति देता है, लेकिन शुल्क उचित और पारदर्शी होने चाहिए।
ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है?

यदि आपका खाता सामान्य बचत खाता है और उसमें Minimum Average Balance बनाए रखना अनिवार्य है, तो:
- खाते की शर्तें ध्यान से पढ़ें।
- Minimum Average Balance बनाए रखें।
- यदि नियमित बैलेंस रखना संभव नहीं है, तो Zero Balance या BSBDA जैसे विकल्पों की जानकारी अपने बैंक से लें।
- SMS और ईमेल अलर्ट सक्रिय रखें ताकि शुल्क लगने पर तुरंत जानकारी मिल सके।
क्यों छिड़ी नई बहस?
एक ओर बैंक इन शुल्कों को खाता संचालन और सेवा लागत से जोड़ते हैं, वहीं उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इससे कम आय वाले ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन के दौर में यह बहस तेज हो गई है कि क्या सभी बचत खातों पर Minimum Balance Charges जारी रहना चाहिए या इन्हें और सीमित किया जाना चाहिए।
FAQs
1. Minimum Balance Charges क्या हैं?
यह वह शुल्क है जो बैंक तब वसूलते हैं जब ग्राहक अपने खाते में निर्धारित Minimum Average Balance (MAB) बनाए नहीं रखते।
2. FY26 में बैंकों ने कुल कितनी राशि वसूली?
संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों ने करीब ₹7,100 करोड़ Minimum Balance Charges के रूप में वसूले।
3. किस बैंक ने सबसे अधिक चार्ज वसूला?
FY26 में HDFC Bank ने लगभग ₹1,798.14 करोड़ और Axis Bank ने ₹1,081.33 करोड़ Minimum Balance Charges के रूप में वसूले।
4. क्या सभी खातों पर यह चार्ज लागू होता है?
नहीं। प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) और Basic Savings Bank Deposit Account (BSBDA) जैसे खातों पर Minimum Balance बनाए रखने की बाध्यता नहीं होती।
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