उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में आज प्रदेश हित से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंज़ूरी दी गई। ये फैसले न केवल प्रशासनिक कार्यक्षमता को बढ़ाने वाले हैं, बल्कि कृषि, आपदा प्रबंधन, और बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होंगे। आइए एक-एक कर समझते हैं कि क्या हैं ये फैसले और इनका प्रभाव उत्तराखंड की जनता पर कैसे पड़ेगा—
🟢 1. कृषि विभाग में 46 पदों का सृजन: युवाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता
राज्य सरकार ने कृषि एवं कृषि कल्याण विभाग में 46 नए पदों को स्वीकृति दी है। इससे विभागीय कार्यों में तेजी आएगी, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी। साथ ही यह निर्णय बेरोजगार युवाओं के लिए सरकारी नौकरी की संभावनाओं को भी खोलेगा। माना जा रहा है कि इन पदों में तकनीकी और फील्ड स्टाफ की नियुक्ति से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
🟢 2. बागेश्वर में खनन निगरानी के लिए 18 नए पद: हाई कोर्ट के आदेश का पालन
उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा खनन कार्यों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देशों के अनुपालन में बागेश्वर ज़िले में 18 अतिरिक्त पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। यह निर्णय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिहाज से अहम है। इन पदों के जरिए खनन गतिविधियों की मॉनिटरिंग को मजबूती मिलेगी और अवैध खनन पर भी लगाम लगेगी।
🟢 3. बाढ़ नियंत्रण कार्यों को मिली मंज़ूरी: आसान बैराज से भट्टा फाल तक सुरक्षा कवच
प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिसीमन 2012 के तहत आसान बैराज से भट्टा फाल तक बाढ़ से सुरक्षा हेतु 5 निर्माण कार्यों को हरी झंडी दे दी है। मानसून से पहले इस निर्णय को अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र भारी वर्षा और बाढ़ के खतरे की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इन कार्यों से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
🟢 4. PWD के पांच गेस्ट हाउस अब PPP मोड पर: राजस्व बढ़ाने की पहल
राज्य सरकार ने PWD के 5 गेस्ट हाउस भवनों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में देने की स्वीकृति दी है। यह निर्णय पर्यटन और राजस्व दोनों दृष्टियों से लाभकारी माना जा रहा है। इससे न केवल इन गेस्ट हाउसों का बेहतर रखरखाव होगा, बल्कि सरकार को स्थायी आय का स्रोत भी मिलेगा।
🟢 5. आबकारी सेस से महिला एवं बाल कल्याण योजनाएं: नई नियमावली लागू
उत्तराखंड आबकारी अधिनियम के तहत शराब बिक्री से प्राप्त 1% सेस की राशि को महिला एवं बाल विकास योजनाओं में कैसे उपयोग किया जाए, इसके लिए नियमावली बनाई गई है। इस निर्णय से महिला सशक्तिकरण, पोषण और बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को वित्तीय मजबूती मिलेगी। सामाजिक दृष्टि से यह एक प्रगतिशील कदम है।
धामी सरकार के इन फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता, आपदा प्रबंधन, और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में ठोस कदम उठा रही है। नौकरियों का सृजन, बाढ़ से सुरक्षा, खनन पर निगरानी और महिला-शिशु कल्याण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देना आने वाले चुनावों की नीति दिशा को भी दर्शाता है।