भारत में सोशल मीडिया पर उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पेपर लीक पर रिकॉर्ड किया गया सेल्फी वीडियो Meta के Facebook प्लेटफॉर्म पर भारत में उपलब्ध नहीं रहा। वीडियो खोलने पर यूज़र्स को संदेश दिखाई दिया—“This post is not available in India due to a legal request.”
यह वीडियो कुछ ही दिनों में लगभग 1 करोड़ (करीब 93 लाख से अधिक) व्यूज़, लाखों लाइक्स, हजारों शेयर और बड़ी संख्या में टिप्पणियां हासिल कर चुका था। इसके बाद अचानक भारत में इसकी उपलब्धता रोक दिए जाने से सोशल मीडिया पर सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। हालांकि यही संदेश और वीडियो X पर उपलब्ध रहा, जहां प्रधानमंत्री ने इसे साझा किया था।

क्या था वीडियो में?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश में कहा था कि पेपर लीक के मामलों के खिलाफ सरकार और अधिक सख्त कदम उठाने जा रही है तथा अगले कैबिनेट की बैठक में इस विषय पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। यह संदेश NEET-UG सहित विभिन्न परीक्षा विवादों के बीच सामने आया था।
Facebook पर क्या दिखाई दिया?
भारत में कई यूज़र्स ने स्क्रीनशॉट साझा किए जिनमें लिखा था:
“Post is not available in India. The attached media isn’t available in your region due to a legal request.”
इस संदेश का सामान्य अर्थ यह होता है कि किसी सक्षम प्राधिकरण के अनुरोध के आधार पर संबंधित सामग्री को किसी विशेष क्षेत्र में सीमित किया गया है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इस विशेष मामले में अनुरोध किस एजेंसी या प्राधिकरण की ओर से किया गया। इस संबंध में आधिकारिक विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
Meta की ओर से क्या जानकारी?
इस घटना पर Meta की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है। हालांकि इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में एक अन्य मामले के दौरान Meta ने कहा था कि कई बार उसे सरकारी या कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुरोध पर सामग्री को क्षेत्रीय स्तर पर रोकना पड़ता है और प्रारंभिक चरण में उसे हमेशा संबंधित आदेश जारी करने वाली एजेंसी का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं होता।
सोशल मीडिया पर मचा बवाल
वीडियो ब्लॉक होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
- कुछ लोगों ने इसे सेंसरशिप बताया।
- कई यूज़र्स ने मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि कानूनी अनुरोध किसने भेजा।
- कुछ लोगों ने Meta की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
- वहीं अन्य यूज़र्स ने कहा कि यदि कानूनी आदेश था तो प्लेटफॉर्म को उसका पालन करना ही पड़ता है।
Reddit और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस विषय पर व्यापक चर्चा देखने को मिली, हालांकि वहां व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
X पर वीडियो रहा उपलब्ध
Facebook पर प्रतिबंध के बावजूद प्रधानमंत्री का वही संदेश X (पूर्व में Twitter) पर उपलब्ध रहा और वहां से लोग वीडियो देख सके। प्रधानमंत्री कार्यालय और PIB ने भी इसी संदेश का आधिकारिक उल्लेख किया है।
क्या IT Rules के तहत ऐसा संभव है?
भारत में सूचना प्रौद्योगिकी कानून और संबंधित नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में सरकार या अधिकृत एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से विशेष सामग्री को हटाने या किसी क्षेत्र में सीमित करने का अनुरोध कर सकती हैं। प्लेटफॉर्म ऐसे अनुरोधों के आधार पर क्षेत्रीय स्तर पर कंटेंट रोक सकते हैं। हालांकि प्रत्येक मामले की कानूनी प्रक्रिया अलग हो सकती है।
विपक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के वीडियो पर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी। कुछ नेताओं ने इसे सरकार की देर से आई प्रतिक्रिया बताया, जबकि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का संकेत दिया।
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इस पूरे विवाद से उठे बड़े सवाल
- क्या किसी प्रधानमंत्री का आधिकारिक संदेश भी क्षेत्रीय रूप से ब्लॉक किया जा सकता है?
- क्या Meta को यह बताना चाहिए कि कानूनी अनुरोध किस एजेंसी से आया?
- क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अधिक पारदर्शिता अपनानी चाहिए?
- क्या भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट सार्वजनिक प्रकटीकरण व्यवस्था होनी चाहिए?
इन सवालों पर आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
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