बाबा खाटू श्याम के लक्खी मेले में: धार्मिक उत्सव और भक्ति का महासंगम, जान ले इस बार की इन बड़ी पाबंदियों को

हर साल बाबा खाटू श्याम के मंदिर में आयोजित होने वाले लक्खी मेले का आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक के रूप में किया जाता है। बाबा खाटू श्याम को हारे हुए का सहारा माना जाता है, और इस मेले में उनके भक्त उनकी शरण में आकर अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए आते हैं।

बाबा खाटू श्याम के जन्मदिन के अवसर पर हर साल यह मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें भक्तों के संख्या लाखों में होती है। इस साल फाल्गुन महीने में आयोजित हो रहे इस मेले में निशान की ऊंचाई में कटौती की गई है, और कई अन्य नियमों का पालन किया जा रहा है।

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर को 1027 ईस्वीं में राजा रूप सिंह ने बनाया था, और इसके बाद 1720 ई. के करीब देवान अभय सिंह ने मंदिर में कुछ बदलावों के साथ पुनिर्माण कराया।

मंदिर की बनावट की बात करें, तो इसे पत्थरों और संगमरमर से बनवाया गया है। मंदिर के बाहर एक प्रार्थना कक्ष है जबकि मंदिर में एक कुंड भी है, जहां पर लोग स्नान करते हैं। बाबा भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए यहां पर चुन्नी और धागे भी बांधे जाते हैं।

बाबा खाटू श्याम के मेले में लक्खी का आयोजन उनके भक्तों को संग्रह करने, उनकी भक्ति को उत्साहित करने और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन करने के लिए किया जाता है।

राजस्थान के सीकर में स्थित खाटूश्यामजी में बाबा श्याम का वार्षिक फाल्गुन मेला 11 मार्च से शुरू हो गया है। मुख्य मेला एकादशी पर 21 मार्च को भरेगा। मंदिर कमेटी का अनुमान है कि 11 दिन चलने वाले मेले में 30 लाख भक्त आएंगे

सीकर जिला प्रशासन ने कई चीजों पर लगाई रोक 

1. बाबा खाटूश्याम के भक्त इस बार आठ फीट से अधिक ऊंचा निशान नहीं ले जा सकेंगे।

2.कांच की शीशी

3. और डीजे पर भी रोक लगाई गयी है।

 

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