उत्तराखंड

घर में लगे हैं नल…फिर भी गधेरे से ढो रहे जल, पानी की बूंद-बूंद को तरसे 200 परिवार

अल्मोड़ा में बीते दिनों हुई बारिश के बाद पेयजल योजना क्षतिग्रस्त होने से विकासखंड के बिन्ता, कासिना में जलापूर्ति ठप है। इससे 200 परिवार पानी के लिए तरस गए हैं। ग्रामीण गधेरे से दूषित पानी ढोकर अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूर हैं। एक सप्ताह बाद भी जलापूर्ति सुचारू न होने से ग्रामीणों में खासा आक्रोश है। बिन्ता और कासिना की डेढ़ हजार की आबादी की प्यास बुझाने के लिए पातो गधेरे से बनी पेयजल योजना आठ मई को बारिश के चलते क्षतिग्रस्त हो गई थी जो अब तक ठीक नहीं हो सकी है। योजना के पाइप बहने से इन गांवों में जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। किसी तरह ग्रामीण गधेरे से पानी ढोकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। वहीं, बड़फाट सिंचाई नहर का 50 मीटर हिस्सा बहने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। बुआई का समय नजदीक होने से क्षेत्र के किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।

मध्याह्न भोजन पकाने के लिए ढोना पड़ रहा है पानी
द्वाराहाट में पेयजल योजना क्षतिग्रस्त होने से कासिना विद्यालय में जलापूर्ति ठप है। मध्याह्न भोजन पकाने के लिए भोजनमाता किसी तरह पानी का प्रबंध कर रही है। वहीं, विद्यार्थी घरों से बोतल में पानी ढोकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
जल्द जलापूर्ति सुचारू न होने पर आंदोलन की चेतावनी
द्वाराहाट में जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने राजस्व उपनिरीक्षक खीम सिंह नेगी के साथ योजना का निरीक्षण किया। वहीं उन्होंने उप तहसील पहुंचकर नायब तहसीलदार को ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वे जल संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन योजना ठीक कर जलापूर्ति के प्रयास नहीं हो रहे। उन्होंने जल्द योजना का सुधारीकरण न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। इस मौके पर बसंत कैड़ा, प्रह्लाद कैड़ा, पंकज कैड़ा, मोहन सिंह अधिकारी, धीरज, मुन्नी कैड़ा सहित कई लोग शामिल रहे।

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