केदारनाथ की पवित्र घाटी में ‘VIP उड़ान’! नियमों की कब्र पर उतरा हेमंत द्विवेदी का हेलीकॉप्टर?

जब आम श्रद्धालुओं की श्रद्धा बादलों में अटक गई, तब वीआईपी भक्त सीधे केदारनाथ की गोद में उतरे!

उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आस्था और नियम दोनों की खूब दुहाई दी जाती है — पर जब बात ‘खास लोगों’ की आती है, तो नियम खुद रास्ता छोड़ देते हैं। केदारनाथ धाम में हेलीकॉप्टर सेवा पूरी तरह प्रतिबंधित है — DGCA और UCADA दोनों की स्पष्ट पाबंदी के बावजूद भी एक निजी हेलीकॉप्टर हवाई रस्ता पार कर वहां उतरा… और उसमें कोई आम यात्री नहीं, बल्कि BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी खुद सवार थे।

🌩️ जहाँ नियम रुकते हैं, वहाँ VIP उड़ते हैं!

आम भक्तों को मौसम का हवाला देकर हेली टिकट नहीं दिए जा रहे। हादसों की आड़ में सेवा बंद है। लेकिन हेमंत द्विवेदी और उनके सहयोगी उसी बंद सेवा से कैसे उड़ चले? क्या उन्होंने मौसम को चकमा दिया, या नियमों को जेब में डाल लिया?

🎫 BKTC अध्यक्ष बोले: “मैंने तो टिकट बुक किया था!”

वाह! फिर तो अगली बार कोई आम यात्री भी कहेगा – “मैंने भी टिकट बुक किया था”, और बिना SOP, बिना UCADA अनुमति, सीधे बाबा के दरबार में हेलीकॉप्टर उतार देगा?

हेलीकॉप्टर की उड़ान नियमों के खिलाफ, मौसम खराब, SOP का पालन नहीं – UCADA ने नोटिस तो भेजा, लेकिन असली सवाल यह है:

क्या नोटिस सिर्फ एविएशन कंपनी को जाएगा या VIP यात्रियों की भी जवाबदेही तय होगी?

❗ गरिमा दसौनी का करारा सवाल:

कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने सीधा वार किया – “जब आम श्रद्धालुओं के लिए हेली सेवा बंद है, तो BKTC अध्यक्ष को क्यों छूट? ये VIP संस्कृति नहीं तो और क्या है? क्या भारत में एक देश, दो नियम चलते हैं?”

🔎 जांच में अब तक क्या?

  • हेलीकॉप्टर हेरिटेज एविएशन का था
  • UCADA अधिकारी संजय टोलिया ने कहा – “SOP और मौसम के नियमों की अवहेलना हुई
  • जांच 1–2 दिन में पूरी होने की बात कही गई है
  • लेकिन अब तक BKTC अध्यक्ष से न तो कोई जवाब-तलब हुआ, न ही किसी प्रशासनिक प्रमुख की कोई कड़ी टिप्पणी आई

🚨 जनता के सवाल और सोशल मीडिया की आग:

  • क्या हेली नियम सिर्फ आम श्रद्धालुओं के लिए हैं?
  • क्या BKTC जैसे संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति नियमों से ऊपर है?
  • क्या UCADA की कार्रवाई VIP यात्रियों तक पहुंचेगी या वही पुराना “नोटिस-इनक्वायरी-फाइल क्लोज़” मॉडल चलेगा?

✍️ अब यह सिर्फ उड़ान नहीं, प्रशासनिक ढोंग की परतें उधेड़ती एक कहानी है

केदारनाथ की भूमि सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आस्था का प्रतीक है। वहां कोई नियम तोड़ता है, तो वो सिर्फ कानून नहीं, श्रद्धा के संविधान को लांघता है। और अगर ये सब कुछ एक धार्मिक न्यास के अध्यक्ष के नेतृत्व में हो रहा हो, तो प्रश्न और भी तीखे हो जाते हैं।


📢 इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, UCADA प्रमुख और एविएशन मंत्रालय को जवाब देना चाहिए — नहीं तो यह मान लेना होगा कि उत्तराखंड में नियम आम लोगों के लिए हैं, VIP आस्था के नाम पर मनमानी उड़ान भर सकते हैं।

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