नई दिल्ली। आगामी 3-4 सितंबर को होने वाली GST परिषद की बैठक को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक से आम जनता को बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव फिलहाल टल सकता है।
क्या है चर्चा में?
पिछले कई महीनों से GST संरचना को दो स्लैब में सरल बनाने की चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होने से कर प्रणाली पारदर्शी बनेगी और टैक्स अनुपालन भी आसान होगा। हालांकि, केंद्र और राज्यों की राजस्व चिंताएं इस सुधार को तुरंत लागू करने में सबसे बड़ी बाधा बन सकती हैं।
CBIC ने दी सख्त हिदायत
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने पहले ही मीडिया और जनता को GST दरों में बदलाव पर अटकलें न लगाने की सलाह दी है। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार इस बार कंसल्टेशन मोड में रहना चाहती है, न कि बड़े निर्णय की ओर बढ़ना।
राज्यों की स्थिति
कई राज्य फिलहाल राजस्व जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। वे चाहते हैं कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले केंद्र उनकी भरपाई की ठोस गारंटी दे। यही वजह है कि परिषद इस बार संभवतः दर स्लैब सुधारों के बजाय छोटे-छोटे क्षेत्रीय राहत पैकेजों और अनुपालन में ढील पर ध्यान केंद्रित कर सकती है।
आम आदमी को कब मिलेगी राहत?
आम उपभोक्ताओं की नजर इस बैठक पर इसलिए है क्योंकि सरल टैक्स संरचना से रोजमर्रा की चीज़ें सस्ती हो सकती हैं। लेकिन संकेत यही मिल रहे हैं कि जनता को राहत अभी नहीं, बल्कि आने वाली बैठकों तक का इंतज़ार करना पड़ सकता है।