उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज वो दिन दर्ज हो गया है, जो दशकों तक याद किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने गोविंद बल्लभ पंत का 8 साल 127 दिन का रिकॉर्ड तोड़ते हुए यूपी के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता का ताज पहन लिया है।
लेकिन ये सिर्फ रिकॉर्ड टूटने की कहानी नहीं है — ये उस भरोसे की कहानी है जो जनता ने लगातार दो बार योगी को कमान सौंपकर दिखाया। यूपी की सत्ता में अब तक कोई भी मुख्यमंत्री दो लगातार पूर्ण कार्यकाल पूरे नहीं कर पाया था — योगी आदित्यनाथ पहले हैं, जिन्होंने ये चमत्कार कर दिखाया।
ना कोई ब्रेक, ना कोई सत्ता संकट — बस विकास, प्रशासन और ‘योगी स्टाइल’ का दबदबा।
जब 2017 में योगी आदित्यनाथ को सीएम पद मिला, तब बहुतों को शक था कि गोरखपुर से आया ये सन्यासी नेता कैसे पूरे प्रदेश को संभालेगा। लेकिन आज वही नेता ‘रिकॉर्ड ब्रेकर’ बन गया है।
उनके कार्यकाल में प्रदेश में माफिया राज पर चोट हुई, कानून व्यवस्था में सख्ती आई, और धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों को नई जान मिली। इन सबके बीच योगी ने अपनी प्रशासनिक पकड़ और सख्त फैसलों से जनता के बीच गहरी पैठ बनाई।
ना सिर्फ राजनीति में लंबी पारी, विकास में भी रफ्तार नंबर वन!
योगी सरकार ने सिर्फ कुर्सी पर टिककर इतिहास नहीं रचा — विकास की पटरी पर दौड़ता एक नया उत्तर प्रदेश भी गढ़ा।
बीते 8 वर्षों में यूपी ने देश की दूसरी सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल कर लिया है। एक वक्त जिस राज्य को ‘बैकवर्ड’ कहा जाता था, वहां अब 5 लाख करोड़ से ज़्यादा का निवेश MoUs में तब्दील हो चुका है।
- एक्सप्रेसवे नेटवर्क में यूपी आज पूरे देश से आगे निकल गया है — पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और अब गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स से प्रदेश की स्पीड दोगुनी हो चुकी है।
- इज ऑफ डूइंग बिजनेस में यूपी टॉप-3 में आता है।
- डिफेंस कॉरिडोर, फिल्म सिटी, डिजिटल यूपी जैसी योजनाएं, राज्य को उद्योग और तकनीक का हब बना रही हैं।
- वहीं ग्रामीण इलाकों में PM Awas Yojana, उज्ज्वला योजना, और स्वच्छ भारत मिशन का सीधा असर दिखा है।
यूपी अब सिर्फ जनसंख्या में नंबर वन नहीं, निवेश और निर्माण में भी आगे है।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने न सिर्फ राजनीति का कीर्तिमान रचा, बल्कि खुद को एक उभरती हुई शक्ति के रूप में देश के नक्शे पर फिर से स्थापित किया है।