नई दिल्ली। मोदी सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए ऋण प्रक्रिया में सबसे बड़ी रुकावट दूर कर दी है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बैंकों को केवल CIBIL स्कोर के आधार पर किसी भी आवेदक को लोन देने से मना करने की इजाज़त नहीं होगी। यह फैसला खासतौर पर उन लोगों के लिए वरदान है जो पहली बार लोन लेना चाहते हैं लेकिन जिनके पास क्रेडिट हिस्ट्री मौजूद नहीं है।
क्या कहा RBI ने?
ऋण पात्रता तय करने के लिए कोई न्यूनतम क्रेडिट स्कोर अनिवार्य नहीं है।
बैंक अब केवल CIBIL स्कोर पर भरोसा करके आवेदन अस्वीकृत नहीं कर सकते।
आय, नौकरी/व्यवसाय की स्थिरता, पुनर्भुगतान क्षमता और अन्य दस्तावेज़ों को भी ध्यान में रखना होगा।
किसे मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?
1. पहली बार लोन लेने वाले युवा – चाहे घर, गाड़ी या शिक्षा के लिए।
2. स्टार्टअप और छोटे व्यापारी – जिन्हें अब बैंक से आसानी से बिज़नेस लोन मिलेगा।
3. ग्रामीण और अर्ध-शहरी ग्राहक – जिनका अब तक कोई क्रेडिट इतिहास नहीं था।
क्यों ज़रूरी था यह बदलाव?
अब तक लाखों लोग सिर्फ इसलिए लोन से वंचित रह जाते थे क्योंकि उनके पास CIBIL स्कोर नहीं था। इससे युवाओं, उद्यमियों और आम नागरिकों के सपने अधूरे रह जाते थे। सरकार ने इस बाधा को हटाकर वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
आर्थिक हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से लोन तक पहुंच आसान होगी, खपत और निवेश बढ़ेगा, और बैंकिंग सेक्टर में नए ग्राहकों की संख्या तेज़ी से बढ़ेगी।
अब “नो CIBIL स्कोर” = “नो लोन” का डर खत्म।
पहली बार लोन लेने वालों को मिलेगा न्यायपूर्ण अवसर।
मोदी सरकार की नीतियों से वित्तीय समावेशन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा।